अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली – फ़राज़ शायरी

अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली – फ़राज़

ऐसा नहीं के हम को मोहब्बत नहीं मिली
तुम्हें चाहते थे , पर तेरी उल्फत नहीं मिली

मिलने को ज़िन्दगी में तो कई हमसफ़र मिले
पर उन की तबियत से तबियत नहीं मिली

चेहरों में दूसरों के तुझे ढूँढ़ते रहे
सूरत नहीं मिली कहीं सीरत नहीं मिली

बहुत देर से आया तू मेरे पास
अल्फ़ाज़ ढूंढने की भी मोहलत नहीं मिली

तुझ को गिला है के तवज्जो न दी तुझे
लेकिन हम को तो खुद अपनी मोहब्बत नहीं मिली

हम को तो तेरी हर आदत अच्छी लगी  “फ़राज़
अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली

हिंदी और  उर्दू   शायरी  – फ़राज़  शायरी  – अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली 

 

Afsos Ke Tujh Se Meri Aadat Nahi Mili

Aisa Nahi Ke Hum Ko Mohabbat Nahi Mili
Tumhain Chahtay Thay, Par Teri Ulfat Nahi Mili

Milnay Ko Zindagi Mein Toh Kayi Hamsafar Milay
Par Un Ki Tabiyat Se Tabiyat Nahi Mili

Chehron Mein Dosron Ke Tujhe Dhoondtay Rahay
Soorat Nahi Mili Kaheen Seerat Nahi Mili

Bohat Dair Se Aaya Tu Mere Paas
Alfaaz Dhoondnay Ki Bhi Mohlat Nahi Mili

Tujh Ko Gila Hai Ke Tawajja Na Di Tujhe
Laikin Ham Ko To Khud Apni Mohabbat Nahi Mili

Ham Ko Toh Teri Har Aadat Achi Lagi “Faraz”
Afsos Ke Tujh Se Meri Aadat Nahi Mili

Hindi and urdu shayari and kalam – Faraz Shayari – Afsos Ke Tujh Se Meri Aadat Nahi Mili
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