Ahmad Faraz – Shayari – (A Pakistani Shayar)

 

Ahmad Faraz – Shayari – (A Pakistani Urdu Shayar)

दिल बेक़रार अपना है

तू पास भी हो तो दिल बेक़रार अपना है
के हम को तेरा नहीं इंतज़ार अपना है

मिले कोई भी तेरा ज़िकर छेड़ देते हैं
के जैसे सारा जहाँ राज़दार अपना है

वो दूर हो तो बजा तर्क -ऐ -दोस्ती का ख्याल
वो सामने हो तो कब इख्तियार अपना है

ज़माने भर के दुखों को लगा लिया दिल से
इस आसरे पर के इक गमगुसार अपना है

फ़राज़” राहत-ऐ-जान भी वही है क्या कीजिये
वो जिस के हाथ से सीनाफिगार अपना है ​

Ahmed Faraz Urdu Romantic Shayari – Tu Paas Bhi Ho To Dil Beqaraar Apanaa Hai
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जान से इश्क़

जान से इश्क़ और जहाँ से गुरेज
दोस्तों ने किया कहाँ से गुरेज
इब्तदा की तेरे कसीदे की
अब मुश्किल करू कहाँ से गुरेज
में वहाँ हूँ जहाँ जहाँ तुम हो
तुम करोगे कहाँ कहाँ से गुरेज
कर गया तेरे मेरे किस्से मैं
दास्ताँ वो जहाँ वहाँ से गुरेज

“Ahmad FARAZ Urdu Shayari” – jaan se ishq aur jahaan se gurej
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तेरे ख्वाब

बड़ी मुश्किल से सुलाया था खुद को “फ़राज़” मैंने आज
अपनी आँखों को तेरे ख्वाब का लालच दे कर

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – BADI MUSHKIL SE SULAAYA THA KHUD KO
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उस की हर बात

यही सोच कर उस की हर बात को सच माना है “फ़राज़ “
के इतने ख़ूबसूरत लव झूट कैसे बोलेंगे .

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – KE ITNE KHUBSOORAT LUB JHOOT KAISE BOLEINGE
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ज़िन्दगी

ज़िन्दगी तो अपने ही क़दमों पे चलती है “फ़राज़ “
लोगो के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – ZINDAGI TO APNE HI KADMON PE CHALTI HAI
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हमें तुम से प्यार है

हम पे फ़क़त इलज़ाम के हम हैं ज़ुबान दर्ज़ “फ़राज़”
हम ने तो बस कहा था हमें तुम से प्यार है

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – HUM PE FAQAT ILZAAM KE HUM HAIN ZUBAN DARAZ
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वो बेवफा न था

वो बेवफा न था यूं ही बदनाम हो गया ” फ़राज़ “
हज़ारों चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करता वो

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – WO BEWAFA NA THA YOON HI BADNAAM HO GYA
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तेरा न हो सका

तेरा न हो सका तो मर जाऊंगा “फ़राज़ “
कितना खूबसूरत वो झूट बोलता था

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – TERA NA HO SAKA TO MAR JAONGA “FARAZ”
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हम न बदलेंगे

हम न बदलेंगे वक़्त की रफ़्तार के साथ ‘”फ़राज़”‘
हम जब भी मिलेंगे अंदाज़ पुराना होगा …

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – HAM JAB BHI MILENGAY ANDAAZ PURANA HOGA
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खुद ही बिक गए

किस की क्या मजाल थी जो कोई हम को खरीद सकता “फ़राज़”
हम तो खुद ही बिक गए खरीदार देख कर

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – HUM TO KHUD HI BIK GAYE KHARIDAR DEKH KAR
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उम्र भर का सहारा

कौन देता है उम्र भर का सहारा ऐ “फ़राज़’
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – KAUN DETA HAI UMAR BHAR KA SAHARA AE “FARAZ”
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यह वफ़ा तो

यह वफ़ा तो उन दिनों की बात है “फ़राज़”
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – JAB MAKAAN KACHE OR LOG SACHE HUA KARTEY THE
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इश्क़ का नशा

कुछ इश्क़ का नशा था पहले हम को “फ़राज़”.
दिल जो टूटा तो नशे से मोहब्बत हो गई .

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – KUCH ISHQ KA NASHA THA PEHLE HUM KO
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मिले तो कुछ कह न सके

हम उन से मिले तो कुछ कह न सके “फ़राज़”
ख़ुशी इतनी थी के मुलाक़ात आँसू पोंछते ही गुज़र गई

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – HUM UN SE MILAY TO KHUCH KEH NA SAKAY
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प्यासे गुज़र जाते हैं

तू किसी और के लिए होगा समंदर-ऐ -इश्क़ “फ़राज़”
हम तो रोज़ तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जाते हैं

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – TERE SAHIL SE PIYASE GUZAAR JATE HAIN
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किसी से जुदा होना

किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता “फ़राज़”
जिस्म से रूह को लेने कभी फरिश्ते न आते

TWO LINE “FARAZ” ERRATIC SHAYARI – KISSI SE JUDA HONA AGAR ITNA ASAN HOTA
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मुलाक़ात

हम उन से मिले तो कुछ कह न सके “फ़राज़ ”
ख़ुशी इतनी थी के मुलाक़ात आँसू पोंछते ही गुज़र गई

URDU AND HINDI SHAYARI – MULAQAT – FARAZ SHAYARI- KHUSHI ITNI THE KI MULAQAT
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गुनहगार

लोग पत्थर के बूतों को पूज कर भी मासूम रहे “फ़राज़”
हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए

URDU AND HINDI SHAYARI – GHUNEGAR “FARAZ” SHAYARI– HUM NE EK INSAN KO CHAAHA
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मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Urdu and Hindi Shayari – FARAZ Shayari– meri khamoshi ki tafseel
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प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Urdu and Hindi Shayari – FARAZ Shayari– hume to pyar ki gehraiya “FARAZ”
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सोच में  गुम हैं

उँगलियाँ आज भी इस सोच में  गुम हैं “फ़राज़”
उस ने कैसे नया हाथ थामा होगा.

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – Usne kaise Naye Hath ko Thama hoga

आईना

टूट कर चुभ रहा है आँखों में “फ़राज़”
आईना तो नहीं था ख्वाब मेरा

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – Toot kar chubh Raha hai Aankhon mai

मैं जो महका

मैं जो महका तो मेरी शाख जला दी उस ने “फ़राज़”
सर्द मौसम में मुझे जर्द हवा दी उस ने

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – Main jo mehka to meri shaakh jala di usne

मुलाक़ात

लोग कहते हैं के मुलाक़ात नहीं हुई ” फ़राज़ “
हम तो रोज़ मिलते हैं लेकिन बात नहीं होती

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – Hum tu Rooz Miltay Hain

तमाम उम्र

तमाम उम्र मुझे टूटना बिखरना था ” फ़राज़ “
वो मेहरबान भी कहाँ तक समेटता था मुझे

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – Tamam Umar Mujhe Tootna Bikhrana Tha

नाकामी

अपनी नाकामी का एक यह भी सबब है ” फ़राज़ ”
चीज़ जो भी मांगते हैं सब से जुदा मांगते हैं

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – Apni Naakami Ka Ek Yeh Bhi Sabab Hai

बरसो के प्यासे

बस इतना ही कहा था हम बरसो के प्यासे हैं ” फ़राज़ “
होंटो को उस ने चूम कर खामोश कर दिया .

Hindi and urdu shayari – Faraz Ahmed Shayari – honto ko us ne choom kar khamosh kar diya

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