आलम इक़बाल की शायरी – Allama Iqbal

 

यहाँ अब मेरे राज़दान और भी हैं

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तेहाँ और भी हैं

ताही ज़िंदगी से नहीं यह फिज़ाएँ
यहाँ सैंकड़ों कारवाँ और भी हैं

अगर खो गया एक नशेमन तो किया गम
मक़ामात-ऐ-आह-ओ-फ़िगन और भी हैं

तू शाहीन है , परवाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आसमान और भी हैं

इसे रोज़-ओ-शब में उलझ कर न रह जा
कह तेरे ज़मान-ओ-मकाँ और भी हैं

गए दिन के तनहा था मैं अंजुमन में
यहाँ अब मेरे राज़दान और भी हैं

URDU SHAYARI – ALLAMA IQBAL KI SHAYARI AND POETRY – Yahan Ab Mere Raazdaan Aur Bhi Hain
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फूल की पती

फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर

URDU SHAYARI – ALLAMA IQBAL KI SHAYARI AND POETRY – Phool ki paati se kat sakta hai hire ka jigar
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जो लहू से तामीर हुए थे

देख कैसी क़यामत सी बरपा हुई है आशियानों पर इक़बाल
जो लहू से तामीर हुए थे , पानी से बह गए

URDU SHAYARI – ALLAMA IQBAL KI SHAYARI and Poetry – Jo Lahoo Se Tameer Huye The
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हमराज़ बदल डालो

तस्कीन न हो जिस से वो राज़ बदल डालो
जो राज़ न रख पाए हमराज़ बदल डालो

तुम ने भी सुनी होगी बड़ी आम कहावत है
अंजाम का जो हो खतरा आग़ाज़ बदल डालो

पुर-सोज़ दिलों को जो मुस्कान न दे पाए
सुर ही न मिले जिस में वो साज़ बदल डालो

दुश्मन के इरादों को है ज़ाहिर अगर करना
तुम खेल वही खेलो अंदाज़ बदल डालो

ऐ दोस्त करो हिम्मत कुछ दूर सवेरा है
अगर चाहते हो मंज़िल तो परवाज़ बदल डालो

URDU SHAYARI – ALLAMA IQBAL KI SHAYARI and Poetry – Jo raaz na rakh paye hamraaz badal dalo
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अपनी फितरत में

अमल से ज़िन्दगी बनती है , जन्नत भी जहनुम भी
यह कहा की अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है

URDU SHAYARI – ALLAMA IQBAL KI SHAYARI and Poetry – Apni fitrat mein na noori hai na naari hai
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कलंदर की वो बात

पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा

URDU SHAYARI – ALLAMA IQBAL KI SHAYARI and Poetry – qalandar ki woh baat
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इक़रार -ऐ-मुहब्बत

इक़रार -ऐ-मुहब्बत ऐहदे-ऐ.वफ़ा सब झूठी सच्ची बातें हैं “इक़बाल”
हर शख्स खुदी की मस्ती में बस अपने खातिर जीता है

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – iqrar-ae-muhabbat Ehd-ae-wafa
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इश्क़ क़ातिल से

इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी
यह बता किस से मुहब्बत की जज़ा मांगेगा
सजदा ख़ालिक़ को भी इबलीस से याराना भी
हसर में किस से अक़ीदत का सिला मांगेगा

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Ishq Qatil Se Bhi Maqtool Se Hamdardi Bhi
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ऐ बेखबर

सौदागरी नहीं , यह इबादत खुदा की है
ऐ बेखबर ! जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Ae Be-Khaba
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तेरी खिदमत के क़ाबिल

उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki (dedicated to maa) shayari – Teri Khidmat Ke Qabil
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ज़ख्मो से भर दिया सीना

किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना
हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Zakhmoon se bhar Diya Seena
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दर्द में इज़ाफ़ा

और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Dard mein Izaafa
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इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है

बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में .
यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते .
ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है
बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते .

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – IQBAL duniya tujh se nakhush hai
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बड़ा बे-अदब हूँ

तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – bada bai-adab hoon
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दीदार -ऐ -यार

ज़माना आया है बे – हिजबी का , आम दीदार -ऐ -यार होगा ;
सकूत था पर्देदार जिसका वो राज़ अब आशकार होगा .

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayariDeedar-e-Yaar
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इस दौर की ज़ुल्मत में हर कल्बे परेशान को
वो दाग़े मुहब्बत दे जो चाँद को शर्मा दे

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari  – is Doar Ki Zulmat Mein Har Qalbe Preeshan Ko 
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मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर
जहाँ से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर

अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम
निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर

मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा
मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना
तू अपनी आप में पहली अंडायज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari  – Muhabbt Ki Tamna Hai To Phir Wo Vasf Peda Kar
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मिटा दे अपनी हस्ती को अगर खुद मुर्तबा  चाहे
की दाना खाक में मिलकर गुल ओ गुलज़ार बनता है

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Mita de Apni Hasti Ko Agar Khuch Mrtaba Chahe
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हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर
गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है सैतान पर

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Hansi Aati Hai Mujhe Hasrate Insaan Par
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आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी
सोने से काबिल ही मुझे रुला देगी
आँख लग गई भले से तो डर है
कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Yaar Ko maine Mujhe Yaar Ne Sone Na Diyaa
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किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी
गुजरे ज़माने में बहुत बा-कमाल थे हम भी कभी

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Kisi ke Ishq ka hum-o-Khiyaal
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ढूंढ़ता फिरता हूँ ऐ इक़बाल अपने आप को
आप ही गोया मुसाफिर आप ही मंज़िल हूँ मैं

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – dhoondta firtaa hoon aey IQBAL
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उसकी फितरत परिंदों सी थी मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा
उसे उड़ जाना था और मुझे कायम ही रहना था

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – uski Fitraat Parindoon se thi
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किसी की याद ने जख्मों से भर दिया है सीना
अब हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Kisi Ki Yaad ne Zakhmoon
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मुझ सा कोई शख्स नादान भी न हो
करे जो इश्क़ कहता है नुकसान भी न हो

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Mujh sa koi Shakhs
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फूल चाहे थे मगर हाथ में आए पत्थर ,
हम ने आगोश- ऐ-मोहब्बत में सुलाये पत्थर ..

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Phool chahey they magar
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उठा कर चूम ली हैं चंद मुरझाई हुई कलियाँ ,
न तुम ए तो यूं जश्न -ऐ -बहाराँ कर लिया मैने ..

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Utha kar choom li hain
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खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta

जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai
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तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Teri Banda Parwari Se
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और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Urdu and Hindi Shayari – Allama Iqbal – Aur bhi kar daita hai Dard
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10 thoughts on “आलम इक़बाल की शायरी – Allama Iqbal

  1. कुछ बाते करे उनकी, जो बाते करके चले गए ।
    वक्त के रुक जानेका कभी कभी अहसास होता है ।

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