जब बचपन याद आता है – Childhood

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जब बचपन याद आता है – Childhood Poetry

बचपन का जमाना

बचपन का जमाना होता था
खुशियों का खज़ाना होता था

चाहत चाँद को पाने की
दिल तितली का दीवाना होता था

रोने की वजह न होती थी
ना हसने का बहाना होता था

खबर न थी कुछ सुबह की
न शामो का ठिकाना होता था

मट्टी के घर बनते थे
बस उनको गिरना होता था

गम ही जुबान न होती थी
ना ज़ख्मों का पैमाना होता था

बारिस में कागज़ की कस्ती
हर मौसम सुहाना होता था

वो खेल वो साथी होते थे
हर रिश्ता निभाना होता था

Kids poem – childhood Poetry – Bachpan ka zamana
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मन के सच्चे

वो दिन अच्छे थे
जब हम बच्चे थे
झूठ बोला करते थे
मगर मन के सच्चे थे

KIDS POEM – CHILDHOOD POETRY – BACHPAN KA ZAMANA
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बचपन की नींद

वो बचपन की नींद अब ख़्वाब हो गयी
क्या उम्र थी, के रात हुई और सो गए….

KIDS POEM – CHILDHOOD POETRY – BACHPAN KA ZAMANA
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