वक़्त के साथ गर हम भी बदल जाते तो अच्छा था

 

वक़्त के साथ गर हम भी बदल जाते तो अच्छा था

वक़्त के साथ गर हम भी बदल जाते तो अच्छा था …
बहुत अरमान थे दिल में निकल जाते तो अच्छा था …

न शीशे के रह पाये न पत्थर के हो पाये …
किसी अच्छे से साँचे में जो ढल जाते तो अच्छा था …

गिरे तो यूँ गिरे के गिराया सब ने नज़रों से …
ज़रा सा लड़खड़ा कर संभल जाते तो अच्छा था …

वो हम से ऐसे रूठे हैं जैसे हम अंदर से टूटे हैं …
किसी बच्चे की मानिंद ही मचल जाते तो अच्छा था …

सफर में हो कोई साथी तो आसानी सी रहती है …
अकेलेपन के ज़ालिम पल जो टल जाते तो अच्छा था

हिंदी और उर्दू शायरी – रुसबाई और दर्द की शायरी – वक़्त के साथ गर हम भी बदल जाते तो अच्छा था

 

 

Waqt key sath gar hum bhi badal jatay to accha tha

waqt key sath gar hum bhi badal jatay to accha tha…
Bahat arman they dil mein nikal jatey to accha tha…

Na sheeshey ke rah paye na pathar key ho paye…
Kisi acchey se sanchay mein jo dhal jatey to achcha tha…

Girey to yun girey key Giraya sab ne nazaron se…
zara sa ladkhada kar sambhal jatay to accha tha…

Woh hum se aise roothey hain jaise hum ander se tootey hain…
Kisi bachey ki manind hi machal jatey to accha tha…

Safar mein ho koi sathi tuo asani si rehti hai…
Akelaypan key Zalim pal jo tal jate to accha tha

Hindi and urdu shayari – Rusbai aur dard ki Shayari – waqt key sath gar hum bhi badal jatay to accha tha

 

 

आओ बातें करें और हमारे पोस्ट के बारे में हमे बताइये - Please Post the comment