दर्द के लम्हे शायरी – मोहसिन नक़वी (Mohsin Naqvi)

Mohsin Naqvi Shayari

        थक जाता हूँ – “मोहसिन” 

अश्क़ आँखों में छुपाये हुए थक जाता हूँ
बोझ पानी का उठाये हुए थक जाता हूँ

पाओं रखते हैं जो मुझ पर उन्हें एहसास नहीं
मैं निशानात 👣मिटते हुए थक जाता हूँ

बर्फ ऐसी के पिघलती नहीं पानी बन कर
प्यास ऐसी के बुझाते हुए थक जाता हूँ

अच्छी लगती नहीं इस दर्जा शान-शाही भी
हाथ हाथों से मिलते हुए थक जाता हूँ

इतनी क़ब्रें न बनाओ मेरे अंदर “मोहसिन
मैं चराग़ों को जलाते हुए थक जाता हूँ …

दर्द के लम्हे शायरी – मोहसिन नक़वी🥂

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तलक़ीन -ऐ -वफ़ा – “मोहसिन” 

वो जो खुद पैरवी-ऐ-हद-ऐ-वफ़ा करता था
मुझ से मिलता था तो तलक़ीन-ऐ-वफ़ा करता था

उस के दमन में कोई फूल नहीं मेरी लिए
जो मेरी तंगी -ऐ -दमन का गिला करता था

आज जो उसको बुलाया तो वो गुमसुम ही रहा
दिल 💕धड़कने की जो आवाज़ सुना करता था

आज वो मेरी हर एक बात के माने पूछे
जो मेरी सोच की तफ़्सीर लिखा करता था

उस की देहलीज़ पर सदियों से खड़ा हूँ “मोहसिन
मुझसे मिलने को जो लम्हात गिना करता था

दर्द के लम्हे शायरी – मोहसिन नक़वी🥂

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