आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

ANKHEN MILAO GAIR SE

आँखें  मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही , सही
क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही

यह सुबह सुबह चेहरे की रंगत उतरी हुई
कल रात तुम कहाँ थे बताना सही ,सही

दिल ले के मेरा हाथ में कहती हैं मुझ से वो
क्या लोगे इसका दाम बताना सही , सही

आँखें  मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम _ऐ _महफ़िल
साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही , सही

आइमा फरोश भीड़ है तेरी दुकान पर
ग्राहक हैं हम भी माल दिखाना सही , सही

ग़ालिब तो जान _ओ _ दिल से फ़क़त आपका है बस
क्या आप भी हैं उसके बताना सही ,सही

उर्दू और हिंदी शायरी – मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी – आँखें  मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम _ऐ _महफ़िल

 

Ankhen Milao Gair Se – Mirza Galib

Kehna Ghalt Ghalt To Chupana Sahi, Sahi
Qasid Kaha Jo Us Ne Btana Sahi Sahi

Yeh Subah Subah chehre Ki Rangat utri Hui
Kal Raat Tum Kahan The Batana Sahi,Sahi

Dil Le Ke Mera Hath mei Kehte Hain Mujh Se Wo
Kya Loge Iska Daam Batana Sahi, Sahi

Ankhen Milao Gair Se Do Hum Ko Jaam_AE_mehfil
Saqi Tumhen Qasm Hai Pilana Sahi, Sahi

Aiema Farosh Bheer Hai Teri Dukan Par
Gahak Hain Hum Bhi Maal Dikhana Sahi, Sahi

Ghalib To Jaan_O_Dil Se Faqt Apka Hai Bas
Kya Ap Bhi Hain Uske Btana Sahi,Sahi

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Ki Shayari – Ankhen Milao Gair Se Do Hum Ko Jaam_AE_mehfil
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