चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ की शायरी

 

चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ 

ग़म -ऐ- हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई
चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई

अज़ल से कह दो रुक जाए  दो घड़ी
सुना है आने का वादा निभा रहा है कोई

वो इस नाज़ से बैठे हैं लाश के पास
जैसे रूठे हुए को मना रहा है कोई

पलट कर न आ जाए  फिर सांस नब्ज़ की  “फ़राज़” 
इतने हसीं हाथों से मय्यत सजा रहा है कोई

उर्दू  और   हिंदी  शायरी  – फ़राज़ की शायरी – ग़म -ऐ- हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई

 

Chalay Bhi Aaoo Duniya Say Ja Raha Hai Koi – Faraz

Gham-ae-Hayaat Ka Jhagra Mita Raha Hai Koi
Chalay Bhi Aaoo Duniya Say Ja Raha Hai Koi

Azal Say Keh Do Ruk Jayee Do ghadi
Suna Hai Aanay Ka Waada Nibha Raha Hai Koi

Wo Is Naaz Say Baithay Hain Laash Ke Pass
Jaisay Rothay Hue Ko Mana Raha Hai Koi

Palat Ker Na Aa Jaye Pher Saans Nabz Ki Faraz
Itnay Haseen Hathoon Say Mayyat Saja Raha Hai Koi

Hindi and urdu Shayari – Faraz ki Shayari – Gham-ae-Hayaat Ka Jhagra Mita Raha Hai Koi
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