ऐ “हमदम” छोड़ वो तेरे मुक़द्दर में नही

ऐ “हमदम” छोड़ वो तेरे मुक़द्दर में नही 

बैठे बैठे किसी की यादों में खो जाना अब ज़रूरी तो नही
वो बेवफा है ये बताना अब ज़रूरी तो नही

अपने चमन की ताज़गी फूलों के दम से है
हर फूल से खुशबु आना अब ज़रूरी तो नही

मेरा दिल टूटा है यारो एक शीशे की तरह
आवाज़ का आना या न आना अब ज़रूरी तो नही

अलविदा होते वक़्त वो रस्मी रिबयात की तरह
ये कह गया की वादा निभाना अब ज़रूरी तो नही

ऐ “हमदम” छोड़ वो तेरे मुक़द्दर में नही
हाथ फ़क़ीर को दिखाना अब ज़रूरी तो नही

हिंदी और उर्दू शायरी – ऐ “हमदम” छोड़ वो तेरे मुक़द्दर में नही – मुक़द्दर शायरी

 

Aey “Humdam” Chod Wo Tere Muqaddar Mein Nahi

Baithe Baithe Kisi Ki Yadoon Me Khoo Jana Ab Zaruri To Nhi
Wo Bewafa Hai Yeh Batana Ab Zaruri To Nahi

Apne Chaman Ki Tazgi Phoolon Ke Dum Se Hai
Har Phool Se Khushbu Aana Ab Zaruri To Nahi

Mera Dil Toota Hai yaaro ek shishe Ki Tarah
Aawaz ka Aana ya Na Aana Ab Zaruri To Nahi

Alvida Hote Waqt Wo Rasmi ribayaat Ki tarah
Ye Keh Gaya Wada Nibhana Ab Zaruri To Nhi

Aey “Humdam” Chod Wo Tere Muqaddar Mein Nahi
Hath fakir Ko Dikhana Ab Zaruri To Nahi

Hindi and Urdu shayari – Ay “Humdam” Chod Wo Tere Muqaddar Mein Nahi – Muqaddar Shayari
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Originally posted 2017-07-06 05:59:56.

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Author: manytalk

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