हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

Imtehan shayari

 

एक यार शीशे का

पत्थरों की बस्ती में कारोबार शीशे का
कोई भी नहीं करता ऐतबार शीशे का

कांच से बने पुतले कहाँ दूर चलते हैं
चार दिन का होता है यह खुमार शीशे का

बन सँवर के हरजाई आज घर से निकला है
जाने कौन होता है फिर शिकार शीशे का

दिल के आज़माने को एक संग काफी है
बार बार नहीं लेना इम्तेहान शीशे का

फ़राज़ इस ज़माने मैं झूठे हैं सब रिश्ते
हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

हिंदी और उर्दू शायरी – इम्तेहान शायरी – हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

 

Ek Yaar Sheeshee Ka

Patharon Ki Basti Main Karobar Sheeshe Ka
Koi Bhi Nahi Karta Aitbar Sheeshe Ka

Kaanch Se Bane Putlay kahan Door Chalte Hein
Chaar Din Ka Hota Hai Yeh Khumar Sheeshe Ka

Ban Sanwar Ke Harjaai Aaj Ghar Se Nikla Hai
Jane Kon Hota Hai Phir Shikar Sheeshe Ka

Dil Ke Aazmane Ko ek Sang Kafi Hai
Bar Bar Nahi Lena Imtehan Sheeshe Ka

FARAZ Is Zamane Main jhuthe Hein Sub Rishtey
Hum Ne Bhi Banaya Tha ek Yaar Sheeshee Ka

Urdu and Hindi shayari – Imtehan shayari – Ek Yaar Sheeshee Ka
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शाम -ऐ- आलम

अश्क़-ऐ- दौरान की लहर है और हम हैं दोस्तों
इस बे -वफ़ा का शहर है और हम हैं दोस्तों

यह अजनबी सी मंज़िलें और रफ़त -गाह की याद
तन्हाइयों का ज़हर है और हम हैं दोस्तों

लाई अब उड़ा के गए मौसमों की खुशबू
बरखा की रूट का कहर है और हम हैं दोस्तों

शाम -ऐ- आलम ढली तो चली दर्द की हवा
रात का पिछला पहर है और हम हैं दोस्तों

फिरते हैं मिसाल -ऐ -मौज -ऐ -हवा शहर शहर मैं
आवारगी की लहर है और हम हैं दोस्तों

हिंदी और उर्दू शायरी – शाम -ऐ- आलम शायरी – रात का पिछला पहर है और हम हैं दोस्तों

 

Shaam-ae-Alam

Ashq -ae- Douraan Ki Lehar Hai Or Hum Hain Doston
Is Be-Wafa Ka Shaher Hai Or Hum Hain Doston

Yeh Ajnabi Si Manzeelain Or Raft-gaah Ki Yaad
Tanhaion Ka Zehar Hai Or Hum Hain Doston

Lai Hai Ab Uda Ke gaye Musamon Ki Baas
Barkha Ki Rutt Ka kehar Hai Or Hum Hain Doston

Shaam -ae- Alam Dhali To Chali Dard Ki Hawa
Raat Ka Pichla Pehar Hai Or Hum Hain Doston

Phirtay Hain Misaal-ae-Mouj-ae-Hawa Shaher Shaher Main
Aawargi Ki Lehar Hai Or Hum Hain Doston

Urdu and Hindi shayari – Shaam-ae-Alam shayari – Raat Ka Pichla Pehar Hai Or Hum Hain Doston
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Originally posted 2017-07-03 11:59:56.

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Author: manytalk

1 thought on “हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

  1. अबके साबन में ये सरारत हमारे साथ हुई
    मेरा घर था मिट्टी का मेरे घर ही बरसात हुई

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