Faiz Ahmed Faiz – Kuch Ishq Kiya Kuch Kaam Kiya

Faiz Ahmed Faiz

कुछ इश्क़….. किया कुछ काम किया


वो लोग बहुत खुशकिस्मत थे
जो इश्क़….. को काम समझते थे ।
या काम से आशिकी करते थे ।

हम जीते जी मसरूफ़ रहे…….
कुछ इश्क़….. किया कुछ काम किया
काम इश्क़ …… के आड़े आता रहा
और कुछ इश्क़ …… से काम उलझता रहा ।

फिर आखिर तंग आकर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया……..????
दोनों को अधूरा छोड़ दिया ।
कुछ इश्क़……  किया कुछ काम किया


Kuch Ishq Kiya…. Kuch Kaam Kiya


Wo Log Bahut Kushkismat The
Jo Ishq….. Ko Kam Samjthe The
Ya Kaam Se Aashiqui Karte The

Hum Jite Ji Masruuf Rahe…..
Kuch Ishq……  Kiya Kuh Kaam Kiya
Kam Ishq……  Ke Aade Aata Raha
Aur Kuch Ishq…….  Se Kam Uljta Raha

Phir Akhir Tang Akar Humne
Dono Ko Adhura Chod Diya….????
Dono Ko Adhura Chod Diya
Kuch Ishq……  Kiya Kuch Kaam Kiya

 

Poetry written by – Faiz Ahmed Faiz

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