मेरी सोचें भी परेशान मेरे ख़्यालो जैसी

khyal

 

मेरी सोचें भी परेशान मेरे ख़्यालो जैसी

ज़ुल्फ़ रातों सी है रंगत है उजालों जैसी ,
पर तबियत है वही भूलने वालों जैसी ….

ढूंढ़ता फिरता हूँ यूँ लोगों में शबाहत उसकी ,
के “वो ” ख़्वाबों में भी लगती है ख्यालों जैसी ….

उसकी बातें भी दिल फरेब हैं सूरत की तरह ,
मेरी सोचें भी परेशान मेरे ख़्यालो जैसी ..

उसकी “आँखों ” को कभी गौर से देखा है “फ़राज़ ”
सोने वालों की तरह जागने वालों जैसी …

हिंदी और उर्दू शायरी – फ़राज़ की शायरी – मेरी सोचें भी परेशान मेरे ख़्यालो जैसी

 

Meri Sochein Bhi Preshan Mere khyaloon Jaisi

Zulf Raaton si Hai Rangat Hai ujaloon jaisi,
Par Tabiyaat Hai Wohi Bhoolney Waloon jaisi….

Dhoondta Phirta Hoon Yun Logon mein Shabahat Uski,
Ke “WO” Khawabon mein Bhi Lagti Hai Khyaaloon Jaisi….

Uski Baatein Bhi diL faraib hain Surat Ki Tarah,
Meri Sochein Bhi Preshan Mere khyaloon Jaisi..

Uski “AANKHON” Ko Kabhi gaur Se Dekha Hai “FARAZ”
Soney Walon Ki Tarah Jagney Walon Jaisi…

Hindi and urdu shayari –FARAZ Ki Shayari – Meri Sochein Bhi Preshan Mere khyaloon Jaisi

 

 

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