सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

 

सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़ ,
रुकता तो सफर जाता ,चलता तो बिछड़ जाता ,

मयखाना भी उसी का था ,महफ़िल भी उस की ,
अगर पीता तो ईमान जाता ,न पीता तो सनम जाता ,

सजा ऐसी मिली मुझ को ,ज़ख़्म ऐसे लगे दिल पर ,
छुपाता तो जिगर जाता ,सुनाता तो बिखर जाता ……!!!

हिंदी और उर्दू शायरी – मंज़िल , सफर शायरी – सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

 

Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz

Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz,
Rukta To Safar Jaata,Chalta To Bicharr Jaata,

Maikhaana Bhi Usi Ka Tha,Mehfil Bhi Us Ki,
Agar Peeta To Emaan Jaata,Na Peeta To Sanam Jaata,

Saza Aisi Mili Mujh Ko,Zakham Aise Lage Dil Par,
Chupaata To Jigar Jaata,Sunata To Bikhar Jaata……!!!

Hindi and urdu shayari – manzil,safar Ki Shayari -Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz

मैं वो रात हूँ जो कटी नहीं

मुझे ज़िन्दगी की दुआ न दो ​
मेरे ज़िन्दगी से बनी नहीं

कोई ज़िन्दगी पे करे यक़ीन ​
मेरा ज़िन्दगी पे यक़ीन नहीं

ये सफर भी कैसा सफर है यारो
में कभी कहीं तो कभी कहें

मुझे जिस सनम की तलाश थी
वो मिला मगर मिला नहीं

मैं वो बात हूँ जो बनी नहीं
मैं वो रात हूँ जो कटी नहीं ​

हिंदी और उर्दू शायरी – ज़िन्दगी , सफर , दुआ शायरी – मुझे ज़िन्दगी की दुआ न दो

 

Mein Wo Raat Hoon Jo Kati Nahi​

Mujhe Zindagi Ki Dua Na Do​
Mere Zindagi Se Bani Nahi

Koi Zindagi Pe Kare Yaqeen​
Mera Zindagi Pe Yaqeen Nahi

Ye Safar Bhi Kesa Safar Hai Yaro
Me Kabhi Kahin To Kabhi Kahen

Mujhe Jis Sanam Ki Talash Thi
Wo Mela Magar Mela Nahi

Mein Wo Baat Hoon Jo Bani Nahi
Mein Wo Raat Hoon Jo Kati Nahi​

Hindi and urdu shayari – Zindagi,Dua, safar Ki Shayari – Mujhe Zindagi Ki Dua Na Do​

 

 

आओ बातें करें और हमारे पोस्ट के बारे में हमे बताइये - Please Post the comment