मीर की उर्दू शायरी – Mir Taqi Mir Pakistani Urdu Shayari

 

Mir Taqi Mir Urdu Shayari – मीर की उर्दू  शायरी 

रोते फिरते हैं सारी -सारी रात

बेखुदी ले गयी कहाँ हम को
देर से इंतज़ार है अपना

रोते फिरते हैं सारी -सारी रात
अब यही रोज़गार है अपना

दे के दिल हम जो हो गए मजबूर
इसमें क्या इख्तियार है अपना

जिसको तुम आसमान कहते हो “मीर
वो दिलों का गुबार है अपना

MIR TAQI MIR SHAYARI – मीर ताकी मीर – Rote Phirte Hain Saari-Saari Raat
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इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है

क्या कहूँ तुम से मैं के क्या है इश्क़
जान का रोग है , बला है इश्क़

इश्क़ ही इश्क़ है जहां देखो
सारे आलम में भर रहा है इश्क़ .

इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है
यानी अपना ही मुब्तला है इश्क़ .

इश्क़ है तर्ज़ -ओ -तौर इश्क़ के ताईं
कहीं बंदा कहीं खुदा है इश्क़ .

कौन मक़सद को इश्क़ बिन पहुँचा
आरज़ू इश्क़ व मुद्दा है इश्क़

कोई ख्वाहाँ नहीं मोहब्बत का
तू कहे जीन्स-ऐ-नरवा है इश्क़

“मीर” जी ज़र्द होते जाते हैं
क्या कहीं तुम ने भी किया है इश्क़

MIR TAQI MIR SHAYARI – मीर ताकी मीर – Ishq Maashuq Ishq Ashiq Hai
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इश्क़ ही इश्क़

क्या कहूँ तुमसे में की क्या है इश्क़
जान का रोग है , बला है इश्क़
इश्क़ ही इश्क़ है जहाँ देखो
सारे आलम में भर रहा है इश्क़ देखो
इश्क़ माशूक , इश्क़ आशिक़ है
मीर जर्द होते जाते है
क्या कभी तुमने भी किया है इश्क़

Shayari – Mir Taqi Mir – Kya kahun tum se main ke kya hai ishq
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बज़्म

वो आये बज़्म में इतना तो मीर ने देखा
फिर उसके बाद चिरागो में रौशनी ही नहीं रही

Shayari – Mir Taqi Mir – WO AAYE BAZM MEIN ITNA TO MEER NAY DEKHA
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आशिक़ी

फिरते है मीर अब कहाँ ,कोई पूछता नहीं
इस आशिक़ी में इज़्ज़त सादात भी गयी

Shayari – Mir Taqi Mir – Phirtay hain Meer
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अज़ीज़

शर्मिंदा होंगे , जाने भी दो इम्तिहान को
रखेगा तुम को कौन अज़ीज़ , अपनी जान से

Shayari – Mir Taqi Mir – Sharminda hon ge
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