हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

khamoshi

 

 

प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

हिंदी और उर्दू शायरी – फ़राज़ शायरी – हमे तो प्यार की गहराइयाँ “फ़राज़”

 

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote

Urdu and Hindi Shayari – FARAZ Shayari– hume to pyar ki gehraiya “FARAZ”
Like it
[Total: 419 Average: 3.2]

 


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

हिंदी और उर्दू शायरी – फ़राज़ शायरी – मेरी ख़ामोशी की तफ्सील

 

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha

Urdu and Hindi Shayari – FARAZ Shayari– meri khamoshi ki tafseel
Like it
[Total: 419 Average: 3.2]

लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

हिंदी और उर्दू शायरी – ग़ालिब शायरी – लफ़्ज़ों की तरतीब

 

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai

Urdu and Hindi Shayari – GHALIB Shayari– Lafzon ki tarteeb
Like it
[Total: 419 Average: 3.2]

इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते .

हिंदी और उर्दू शायरी – मोहसिन शायरी – सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते

 

Intezar

Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin”
tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete

Urdu and Hindi Shayari – GHALIB Shayari– sari zindagi intezar mein guzar dete
Like it
[Total: 419 Average: 3.2]

ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

हिंदी और उर्दू शायरी – परवीन शाकिर शायरी – एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे

 

Zakham Khil Uthe

Lazim Tha Guzarna Zindagi Se
Bin Zehar Piye Guzara Kab Tha

Kuch Pal Use Dekh Sakte
Ashkoon Ko Mager Gawara Kab Tha

Ham Khud Bhi Judai Ka Sabab The
Us Ka Hi Qasoor Sara Kab Tha

Ab Auron Ke Sath Hai To Kya Dukh
Phele Bhi Koi Hamara Kab Tha

Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
Qatil Ki Taraf Eshara Kab Tha

Ayee Ho To Roshni Hui Hai
Is Baam Main Koi Setara Kab Tha

Dekha Hua Ghar Tha Har Kisi Ne
Dulhan Ki Tarah Sanwara Kab Tha

Urdu and Hindi Shayari – Parveen shakir Shayari– Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe

 

2 thoughts on “हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

आओ बातें करें और हमारे पोस्ट के बारे में हमे बताइये - Please Post the comment