Mirza Ghalib Shayari – मिर्ज़ा ग़ालिब की अनमोल शायरी

mirza-ghalib

 

कोई दिन गर ज़िंदगानी और है

कोई दिन गर ज़िंदगानी और है
अपने जी में हमने ठानी और है 

आतिश -ऐ -दोज़ख में ये गर्मी कहाँ
सोज़-ऐ -गम है निहानी और है

बारह देखीं हैं उन की रंजिशें ,
पर कुछ अब के सरगिरानी और है 

देके खत मुँह देखता है नामाबर ,
कुछ तो पैगाम -ऐ -ज़बानी और है 

हो चुकीं ‘ग़ालिब’ बलायें सब तमाम ,
एक मर्ग -ऐ -नागहानी और है .

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Koi Din Gar Zindagani Aur Hai
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इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया

गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Ishq Ne Ghalib Nikammaa Kar Diyaa
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बाद मरने के मेरे

चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत .
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Baad marne ke mere ghar se yeh samaan niklaa
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दिया है दिल अगर

दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये
हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये

यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये

ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब
की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये

समझ के करते हैं बाजार में वो पुर्सिश -ऐ -हाल
की यह कहे की सर -ऐ -रहगुज़र है , क्या कहिये

तुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल
हमारे हाथ में कुछ है , मगर है क्या कहिये

कहा है किस ने की “ग़ालिब ” बुरा नहीं लेकिन
सिवाय इसके की आशुफ़्तासार है क्या कहिये

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Diya hai dil agar us ko, bashar hai kya kahiye
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कोई दिन और

मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें
चल निकलते जो में पिए होते
क़हर हो या भला हो , जो कुछ हो
काश के तुम मेरे लिए होते
मेरी किस्मत में ग़म गर इतना था
दिल भी या रब कई दिए होते
आ ही जाता वो राह पर ‘ग़ालिब
कोई दिन और भी जिए होते

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – kash ke tum mere liye hote
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दिल-ऐ -ग़म गुस्ताख़

फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Dil-AE-Gham gushtah magar yaad aaya
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हसरत दिल में है

सादगी पर उस के मर जाने की  हसरत दिल में है
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – sadagi par us ke mar jane ke hasrat dil mein hai
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बज़्म-ऐ-ग़ैर

मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब
आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना
मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते “ग़ालिब”
अर्श से इधर होता काश के माकन अपना

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – meh wo kyon bahut pite bazm-e-ghair mein yarab
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साँस भी बेवफा

मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब
यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Ek Din Apni Saans Bhi Bewafa Ho Jaegi
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सारी उम्र

तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Sari Umar Apna Qasoor Dhoondte Rahe
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इश्क़ में

बे-वजह नहीं रोता इश्क़ में कोई ग़ालिब
जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – Be-Wajah Nahi Rota Ishq Me Koi Ghalib
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जवाब

क़ासिद के आते -आते खत एक और लिख रखूँ
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – JO WO LIKHENGE JAWAAB MEIN
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जन्नत की हकीकत

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को “ग़ालिब” यह ख्याल अच्छा है

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – “GHALIB” YEH KHAYAAL ACHCHA HAI
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बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – BEKHUDI BESABAB NAHI “GHALIB”
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शब-ओ-रोज़ तमाशा

बाजीचा-ऐ-अतफाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – HOTA HAI SHAB-O-ROZ TAMASHA MERE AAGE
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कागज़ का लिबास

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – PAHNAA THA BADAY SHAUKK SE KAAGAZ KA LIBAAS
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वो निकले तो दिल निकले

ज़रा कर जोर सीने पर की तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो
वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – WO NIKLE TO DIL NIKLE
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खुदा के वास्ते

खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम
कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले

MIRZA GHALIB SHAYARI – URDU SHAYARI – YAHAN BHI WAHI KAAFIR SANAM NIKLE
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तेरी दुआओं में असर

तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिला के दिखा
नहीं तो दो घूँट पी और मस्जिद को हिलता देख

Urdu and Hindi Shayari – GHALIB Shayari– masjid ko hila kay dikha
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जिस काफिर पे दम निकले

मोहब्बत मैं नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते है जिस काफिर पे दम निकले

Urdu and Hindi Shayari – GHALIB Shayari– mohabbat main nahin hai faraq
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लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Urdu and Hindi Shayari – GHALIB Shayari– Lafzon ki tarteeb
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तमाशा

थी खबर गर्म के ग़ालिब के उड़ेंगे पुर्ज़े ,
देखने हम भी गए थे पर तमाशा न हुआ

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Shayari- Dekhne hum bhi gaye the par tamasha na hua

काफिर

दिल दिया जान के क्यों उसको वफादार , असद
ग़लती की के जो काफिर को मुस्लमान समझा

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Shayari- kaafir ko musalmaan samjha

नज़ाकत

इस नज़ाकत का बुरा हो , वो भले हैं तो क्या
हाथ आएँ तो उन्हें हाथ लगाए न बने
कह सके कौन के यह जलवागरी किस की है
पर्दा छोड़ा है वो उस ने के उठाये न बने

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Shayari- Is nazakat ka bura ho

तनहा

लाज़िम था के देखे मेरा रास्ता कोई दिन और
तनहा गए क्यों , अब रहो तनहा कोई दिन और

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Shayari- ab raho tanha koi din aur

रक़ीब

कितने शिरीन हैं तेरे लब के रक़ीब
गालियां खा के बेमज़ा न हुआ
कुछ तो पढ़िए की लोग कहते हैं
आज ‘ग़ालिब ‘ गजलसारा न हुआ

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Shayari- Kitne Shirin Hain Tere Lab Ke Raqeeb

मेरी वेहशत

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

Urdu and Hindi Shayari – Mirza Galib Shayari- Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi

ग़ालिब

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई
दोनों को एक अदा में रजामंद कर गई

मारा ज़माने ने ‘ग़ालिब’ तुम को
वो वलवले कहाँ , वो जवानी किधर गई

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – dono ko ik ada main raazamand kar gai

तो धोखा खायें क्या

लाग् हो तो उसको हम समझे लगाव
जब न हो कुछ भी , तो धोखा खायें क्या

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – lag ho to usko hum samjhe laagav “ghalib”

अपने खत को

हो लिए क्यों नामाबर के साथ -साथ
या रब ! अपने खत को हम पहुँचायें क्या

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – ho liye kyon namabaar ke sath “ghalib”

उल्फ़त ही क्यों न हो

उल्फ़त पैदा हुई है , कहते हैं , हर दर्द की दवा
यूं हो हो तो चेहरा -ऐ -गम उल्फ़त ही क्यों न हो .

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – ulfat paida hue hai “ghalib”

ऐसा भी कोई

“ग़ालिब ” बुरा न मान जो वैज बुरा कहे
ऐसा भी कोई है के सब अच्छा कहे जिसे

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Naadan ho jo kahte ho kyon jeete hain “ghalib”

तमन्ना कोई दिन और

नादान हो जो कहते हो क्यों जीते हैं “ग़ालिब “
किस्मत मैं है मरने की तमन्ना कोई दिन और

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Naadan ho jo kahte ho kyon jeete hain “ghalib”

आशिक़ का गरेबां

हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की किस्मत ग़ालिब
जिस की किस्मत में हो आशिक़ का गरेबां होना

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Jis Ki Qismat Main Ho Ashiq Ka Greeban Hona

इश्क़

आया है मुझे बेकशी इश्क़ पे रोना ग़ालिब
किस का घर जलाएगा सैलाब भला मेरे बाद

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Ghum-e-hasti ka Asad kis se ho juz marg ilaj

शमा 

गम -ऐ -हस्ती का असद किस से हो जूझ मर्ज इलाज
शमा हर रंग मैं जलती है सहर होने तक ..

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Ho chuki ‘Ghalib’, balayen sub tamam

जोश -ऐ -अश्क

ग़ालिब ‘ हमें न छेड़ की फिर जोश -ऐ -अश्क से
बैठे हैं हम तहय्या -ऐ -तूफ़ान किये हुए

Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari –tahayyaa-e-tuufaa

 

11 thoughts on “Mirza Ghalib Shayari – मिर्ज़ा ग़ालिब की अनमोल शायरी

  1. बहुत सुन्दर कलेक्शन

  2. लोग खामोखां बदनाम करते हैं,
    हम आशिकों को परेशां करते है,
    हमसे कायम कई रवायतें हैं दुनिया की,
    हम ही हैं जो हवा को तूफान करते हैं.

  3. वो हमें भूल भी जायें तो कोई गम नहीं,
    जाना उनका जान जाने से भी कम नहीं,
    जाने कैसे ज़ख़्म दिए हैं उसने इस दिल को,
    कि हर कोई कहता है कि इस दर्द की कोई मरहम नहीं

  4. N the wo aaj n the wo kl……hamne sari jindagi baham barbad ker lee
    7004161274

  5. न उम्मीद थी उसके आने की,
    पर दिल को उम्मीद थी उसके आने की,

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