तुम ने तो कह दिया के मोहब्बत नहीं मिली

सुकून

 

तुम ने तो कह दिया के मोहब्बत नहीं मिली

तुम ने तो कह दिया के मोहब्बत नहीं मिली
मुझ को तो यह भी कहने की मोहलत नहीं मिली

नींदों के देश जाते कोई खुवाब देखते
लेकिन दिया जलाने से फुर्सत नहीं मिली

तुझे खैर शहर के लोगों का खौफ था
और मुझ को अपने घर से इजाज़त नहीं मिली

फिर इख़्तिलाफ़ -ऐ -राऐ की सूरत निकल पड़ी
अपनी यहां किसी से भी आदत नहीं मिली

बेज़ार यूँ हुए के तेरे अहेद में हमें
सब कुछ मिला सुकून की दौलत नहीं मिली ​

हिंदी और उर्दू शायरी – मोहब्बत की शायरी – सब कुछ मिला सुकून की दौलत नहीं मिली ​
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Tumne To Keh Diya ke Mohabbat Nahi Mili

Tum ne to keh diya ke mohabbat nahi mili
mujh ko to yeh bi kehne ki mohlat nahi mili

nendon ke desh jate koi khuwab dekhte
laikin diya jalane se fursat nahi mili

tujh ko to khair sehar ke logon ka khof tha
aur mujh ko apne ghar se ijazat nahi mili

phir ikthilaf-e-raee ki surat nikal padhi
apni yehan kisi se bhi aadat nahi mili

bezaar yoon hoae ke tere aheed main hamain
sab kuch mila sukoon ki doolat nahi mili​

Hindi and urdu shayari – mohabbat ki shayari – Tum ne to keh diya ke mohabbat nahi mili
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