परवीन शाकिर के खूबसूरत नगमे और उर्दू शायरी – PERVEEN SHAKIR


Parveen Shakir

 

Very unique collection from shayari and gazals (ghazalyaat) of Parveen Shakir.She was a prominent women shayara and poet in her era.

रात वो दर्द मेरे दिल में उठा

बाद मुद्दत उसे देखा लोगो
वो ज़रा भी नहीं बदला लोगो

खुश न था मुझ से बिछड़ कर वो भी
उस के चहरे पे लिखा था लोगो

उस की आँखे भी कह देती थी
रात भर वो भी न सोया लोगो

अजनबी बन के जो गुज़रा है अभी
था किसी वक़्त में अपना लोगो

दोस्त तो खैर कौन किस का है
उस ने दुश्मन भी न समझा  लोगो

रात वो दर्द मेरे दिल में उठा
सुबह तक चैन न आया लोगो

प्यास सेहराओं की फिर तेज़ हुई .
अबर फिर टूट के बरसा लोगो

PERVEEN SHAKIR KI DARD SHAYARI – Raat wo Dard Mere Dil Mein Utha
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अक्स -ऐ -खुशबू हूँ

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई

काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में
मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई

जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा
इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई

मैं तो उस दिन से हरासां हूँ के जब हुक्म मिले
खुश्क फूलों को किताबों में न रखे कोई

अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद से दरवाज़े से झांके कोई

कोई आवाज़ ,कोई आहात ,कोई चाप नहीं
दिल की गलिया बड़ी सुनसान हैं आये कोई

AKS-AE-KHUSHBOO URDU SHAYARI – PERVEEN SHAKIR SHAYARI – AKS-AE-KHUSHBOO HOON BIKHARNE SE NA ROKE KOI
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ज़ख़्म-ऐ -जिगर

उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे होंगे अगर तो लौट आएंगे किसी रोज़
अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम
ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़

URDU AND HINDI SHAYARI – PERVEEN SHAKIR SHAYARI- ZAKHAM-AE-JIGAR TUMKO DEKHEIN GAYE KISI ROZ

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मिन्नत -ऐ -सैयाद

बहुत रोया वो हम को याद कर के
हमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के

पलट कर फिर यहीं आ जायेंगे हम
वो देखे तो हमें आज़ाद करके

रिहाई की कोई सूरत नहीं है
मगर हाँ मिन्नत -ऐ -सैयाद कर के

बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन
गया है रूह को आबाद कर के

हर आमिर तोल देना चाहता है
मुकर्रर-ऐ-ज़ुल्म की मीआद कर के

URDU AND HINDI SHAYARI – PERVEEN SHAKIR SHAYARI– APNE ISHQ MEIN SACHCHA CHAAND

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इश्क़ में सच्चा चाँद

पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद
इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद
मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद
सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद

URDU AND HINDI SHAYARI – PERVEEN SHAKIR SHAYARI- APNE ISHQ MEIN SACHCHA CHAAND

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ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

Urdu and Hindi Shayari – Parveen shakir Shayari– Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
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वो न आयेगा

जूस्तजू खोए हुए की उम्र भर करते रहे
चाँद के हमराह हम हर शब सफर करते रहे

हम ने खुद से भी छुपाया और सारे शहर से
तेरे जाने की खबर दीवार -ओ- दर करते रहे

वो न आयेगा हमें मालूम था उस शाम भी
इंतज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari- hamne Khud se bhi chupaya
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हमसफ़र मेरा

बिखर रही है मेरी ज़ात उसे कहना
कभी मिले तो यह बात उसे कहना

वो साथ था तो ज़माना था हमसफ़र मेरा
मगर अब कोई नहीं मेरे साथ उसे कहना

उसे कहना के बिन उस के दिन नहीं कटता
सिसक सिसक के कटती है रात उसे कहना

उसे पुकारूँ के खुद ही पहुँच जाऊं उस के पास
नहीं रहे वो हालात उसे कहना

अगर वो फिर भी न लौटे तो ऐ मेहरबान क़ासिद
हमारी ज़ीस्त के हालात उसे कहना

हार जीत उस के नाम कर रहे हैं
मानती हूँ अपनी हार उस से कहना

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari- Wo sath tha to zamana tha humsafar mera
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मेरे हम-सकूँ 

मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ ..
मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया ……

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari- two Line shayari – kalaam
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तुझी को पूछता रहा

बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू ,
मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari- two Line shayari – aziz

न जाने कौन

न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है
के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया …

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari- two Line shayari – makaan

मसला जब भी उठा चिरागों का

तेरी खुश्बू का पता करती  है
मुझ पे एहसान हवा करती  है

शब की तन्हाई में अब तो अक्सर
गुफ्तगू तुझ से रहा करती है

दिल को उस राह पे चलना ही नहीं
जो मुझे तुझ से जुदा करती है

ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है

उस ने देखा ही नहीं वरना यह आँख
दिल का एहवाल कहा करती है

शाम पड़ते ही किसी शख्स की याद
कूचा-ऐ-जान में सदा करती है

दुःख हुआ करता है कुछ और बयान
बात कुछ और हुआ करती है

अब्र बरसे तो इनायत उस की
शाख़ तो सिर्फ दुआ करती है

मसला जब भी उठा चिरागों का
फैसला सिर्फ हवा करती है

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari – maslaa jab bhi uthaa chiraagon ka

इश्क़ में तुम भी सनम

तुम से कितना प्यार है दिल में उतर के देख लो
न यकीन आये तो फिर दिल बदल के देख लो

हम ने अपनी हर साँस पर नाम तेरा लिख दिया
एक तुझे पाने की खातिर खुद को पागल कर दिया

इश्क़ में तुम भी सनम हद से गुज़र के देख लो
तुम से कितना प्यार है दिल में उतर के देख लो

जाने क्यों सारे जहाँ से हो गयी है बेखबर
जब से तुम आँखूं में आये हो जागती है यह नज़र

अपनी रातों से मेरी रातें बदल के देख लो
तुम से कितना प्यार है दिल में उतर के देख लो

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari – Ishq Me Tum Bhi Sanam Hadh Se Guzar Ke Dekh Lo

सूखा गुलाब मेरी किताबों में

क्यों रखूँ मैं अपने क़लम में स्याही
जब कोई अरमान दिल में मचलता ही नहीं
न जाने क्यों सभी शक करते हैं मुझ पर
जब सूखा गुलाब मेरी किताबों में मिलता ही नहीं
कशिश तो बहुत थी मेरे प्यार में
मगर क्या करू कोई पत्थर दिल पिघलता ही नहीं
अगर खुदा मिले तो उस से अपना प्यार माँगूगा 
पर सुना है वो मरने से पहले किसी से मिलता नहीं

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari – Jab Sookha Gulab Meri Kitaabon Main Milta Hi Nahi

मंज़र

ज़रा देर का है मंज़र
ज़रा देर में फलक पर खिलेगा कोई सितारा
तेरी सिमट देख कर वह करेगा कोई इशारा
तेरे दिल को आएगा फिर किसी याद का बुलावा

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari – zara der ka hai manzar

रंग -ऐ -उम्मीद

देखना यह है की कल तुझ से मुलाक़ात के बाद
रंग -ऐ -उम्मीद खिलेगा के बिखर जाएगा
वक़्त परवाज़ करेगा के ठहर जायेगा
जीत हो जाएगी या खेल बिखर जायेगें
ख्वाब का शहर रहेगा के उजड़ जायेगा

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari – Rang-ae-Umeed Khilega ke bikhar jayega

जब भी गुज़रे हैं किसी दर्द के बाजार से

यह जो चेहरे से तुम्हें लगते हैं बीमार से हम
खूब रोये हैं लिपट कर दर -ओ -दीवार से हम
रंज हर रंग के झोली में भरे हैं हम ने
जब भी गुज़रे हैं किसी दर्द के बाजार से हम

Urdu and Hindi Shayari – Perveen Shakir Shayari – khob roye hain lipat kar dar-o-deewar se hum

 

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