पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

ishq

खुश और उदास – फ़राज़

वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “
मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता …

उर्दू और हिंदी शायरी – फ़राज़ की शायरी – खुश और उदास – फ़राज़ शायरी
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पहले पहले का इश्क़ अभी याद है “फ़राज़”

दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों
मर जाए जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों

हर हुस्न -ऐ -सदा लो न दिल में उतार सका
कुछ तो मिज़ाज -ऐ -यार मैं गहराइयाँ भी हों

दुनिया के तजकरे तो तबियत ही ले बुझे
बात उस की हो तो फिर सुख आराईयां भी हों

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है फ़राज़
दिल खुद यह चाहता था के रुस्वाइयाँ भी हों

हिंदी और उर्दू शायरी – फैज़ अहमद फैज़ शायरी – पहले पहले का इश्क़ अभी याद है फ़राज़

 

Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai “Faraz”

Dil bhi bhuja ho shaam ki parchaiyan bhi hon
Mar jaiyye jo aise main tanhaiyan bhi hon

Har husn-ae-saada loh na dil main utar saka
Kuch to mizaaj-e-yaar mein gehraiyan bhi hon

Duniya ke tazkaray to tabiyat hi le bujhay
Baat us ki ho to phir sukhan aaraiyan bhi hon

Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai Faraz
Dil khud yeh chahta tha ke ruswaiyan bhi hon

Hindi and urdu shayari – Faiz Ahmed Faiz Shayari – Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai Faraz
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