काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ – परवीन शाकिर

परवीन शाकिर

 

मेरे नाम की तरहँ 

यह मेरी ज़ात की सब से बड़ी तमन्ना थी ,
काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ 

हिंदी और उर्दू शायरी – परवीन शाकिर की शायरी – यह मेरी ज़ात की सब से बड़ी तमन्ना थी

 

Mere Naam Ki Tarhan

Yeh Meri Zaat Ki Sab Se Bari Tamanna Thi
Kaash! Ke Woh Mera Hota, Mere Naam Ki Tarhan

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दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़

दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़
कमाल की ग़ज़ल तुम को सुनायेंगे किसी रोज़
थी उन की ज़िद के मैं जाऊँ उन को मानाने
मुझ को ये वेहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़
उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे होंगे अगर, तो लौट आएंगे किसी रोज़

हिंदी और उर्दू शायरी – परवीन शाकिर की शायरी – दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़

 

Dard Kia Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz

Dard Kia Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz
Kamal Ki Ghazal Tum Ko Sunayein Gay Kisi Roz
Thi Un Ki Zid K Main Jaaoun Un Ko Manane
Mujh Ko Ye Veham Tha Wo Bulayein Gay Kisi Roz
Urney Do In Parindon Ko Azaad Fizaon Mein
Tumhare Honge Agar To Lout Aayein Gay Kisi Roz

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तेरी खुशबु का पता करती है

तेरी खुशबु का पता करती है
मुझ पे एहसान हवा करती है
शब की तन्हाई मैं अब तो अक्सर
गुफ्तगू तुझ से रहा करती है
दिल को उस राह पे चलना ही नहीं
जो मुझे तुझ से जुड़ा करती है
ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने मैं रहा करती है
उस ने देखा ही नहीं वरना ये आँख
दिल का हाल बयान कहा करती है
बेनियाज़ -ऐ -कफ -ऐ -दरिया अंगुश्त
रेत पर नाम लिखा करती है

हिंदी और उर्दू शायरी – परवीन शाकिर की शायरी – तेरी खुशबु का पता करती है

 

Teri Khushbu Ka Pata Karti Hai

Teri khushbu ka pata karti hai
Mujh pe ehsan hawa karti hai
Shab ki tanhai main ab to aksar
Guftagu tujh se raha karti hai
Dil ko us rah pe chalna hi nahin
Jo mujhe tujh se juda karti hai
Zindagi meri thi lekin ab to
Tere kahne main raha karti hai
Us ne dekha hi nahin warna ye ankh
Dil ka ehwal kaha karti hai
beniyaz-e-kaf-e-dariya angusht
Ret par nam likha karti hai

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कोई रात 

कोई रात मेरे आश्ना मुझे यूँ भी तो नसीब हो ..
न ख्याल हो लिबास का वो इतना मेरे क़रीब हो ..
बदन की गरम आंच से मेरी आरज़ू को आग दे ..
मेरा जोश भी बहक  उठे मेरा हाल भी अजीब हो ..
तेरे चाशनी वजूद का मैं सारा रस निचोड़ लूँ ..
फिर तू ही  मेरा मर्ज़ हो फिर तू हे मेरा तबीब हो ..

हिंदी और उर्दू शायरी – परवीन शाकिर की शायरी – कोई रात मेरे आश्ना मुझे यौन भी तो नसीब हो

 

KOI RAAT 

KOI RAAT MERE ASHNA MUJHE YOUN BHI TO NASEEB HO..
NA KHYAL HO LIBAS KA WO ITNA MERE QAREEB HO..
BADAN KI GARAM AANCH SE MERI AARZU KO AAG DE..
MERA JOSH BHI BEHAK UTHAY MERA HAAL BHI AJEEB HO..
TERAY CHASHNI WAJOOD KA MAIN SARA RASS NICHOR LOON..
PHIR TU HI MERA MARZ HO PHIR TU HI MERA TABEEB HO..

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