कवितायेँ हमारे बचपन की – Our Childhood Poem’s


Collection of Poem’s

कवितायेँ हमारे बचपन का गीत होती है । हर एक बच्चे का सपना होती है , हर बच्चे को कवितायेँ सुनना और सुनाना बहुत लुभाता है । कभी वो स्कूल में तो कभी घर की छोटी छोटी पार्टी में कवियायें सुनाते  है । कवितायेँ हमारे बचपन की बहुत ही मधुर यादें होती है , और जब हम बड़े हो जाते है तो फिर से बचपन की कवितायेँ सुन कर बचपन मैं कहीं खो जातें है । कविताएँ हर इंसान का मन मोह लेती है । कभी कहीं इन बच्चो की कविताएँ हँसाती है , तो कभी हमे सोचने पर मजबूर कर देतीं है और ज़िन्दगी का सच्चा पाठ सीखा देती है । तो हम सब के लिया कविताएँ …

मेरी बिल्ली

मैंने बिल्ली पाली है
सर से  दुम  तक काली है
बिस्तर पर चढ़ आती है
साथ मेरे सो जाती है
जब मैं उसको पास बुलाऊँ
धीरे से कहती है Meeaaaooonnnnnnnnn

KIDS NAUGHTY POEMS – नटखट कविताएं – मेरी बिल्ली
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भूल गया है क्यों इंसान

भूल गया है क्यों इंसान
सबकी है मिट्टी की काया
सब पर है नव की निर्मल छाया
यहाँ नहीं कोई आया है
ले विशेष वरदान
भूल गया है क्यों इंसान

धरती ने मानव उपजाए
मानव ने देश बनाये
बहुदेशो में बसी हुई है
एक धरा संतान
भूल गया है क्यों इंसान

देश अलग है देश अलग हो
वेश अलग है बेष अलग हो
मानव का मानव से लेकिन
अलग न हो अंतर प्राण
भूल गया है क्यों इंसान

कवि – डा० हरिवंश राय बच्चन

KIDS NAUGHTY POEMS – नटखट कविताएं – भूल गया है क्यों इंसान
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ठुमक ठुमक

ठुमक ठुमक ठुमक ठुम
तेरी चिड़िया की इक टुम
मेरी मैना के दो पैर
एक इधर और एक उधर
तेरी चिड़िया शोर मचाये
मेरी मैना गाना गाये
ठुमक ठुमक ठुमक ठुम

Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – ठुमक ठुमक ठुमक ठुम
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चूँ चूँ चूँ

चूँ चूँ चूँ चूँ चांचां
घड़ी में चूहा नाचा
घड़ी ने एक बजाया
चूहा नीचे आया
हाथ धोया , मुँह धोया
खाना खा के सो गया ​

Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – चूँ चूँ चूँ चूँ चांचां
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लकड़ी की काठी

लकड़ी की काठी
काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा .

Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – लकड़ी की काठी
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मछली जल की रानी है

मछली जल की रानी है ,
जीवन उसका पानी है ,
हाथ लगाओ , डर जायेगी
बाहर निकालो , मर जायेगी

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नाना जी बड़े अच्छे

अठने की छलिया , अठने का पान ​
चल मेरे घोड़े हिंदुस्तान
हिंदुस्तान की पहली गली, उस में रहता आम्रपाली
आम्रपाली को गोली लगी , सारी दुनिया रोने लगी ​
रोते रोते भूख लगी ​, हम ने खाई मुगफली
मुगफली में दाना नहीं , हम तुम्हारे नाना नहीं
नाना गए दिल्ली , दिल्ली से ले लाये बिल्ली
बिल्ली ने दिये दो बच्चे , नाना जी बड़े अच्छे

Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – नाना जी बड़े अच्छे
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तारे तारे कितने नील गगन पे तारे

तारे तारे कितने नील गगन पे तारे
तेरी उमर हो उतने साल जितने नील गगन पे तारे
तारे तारे कितने नील गगन पे तारे

फूल है कितने प्यारे फूलो से प्यारा तू है
Happy bairthday to you Happy bairthday to you
लोग है कितने न्यारे लोगो से न्यारा तू है
Happy bairthday to you
आजा गले लग जा मेरे दिल के सहारे
तारे तारे कितने नील गगन पे तारे

तुम ही मेरे डैडी और तुम ही मेरे मीत
Daddy you are very sweet , Daddy you are very sweet
मम्मी से सीखा है मैंने ये नया गीत
Daddy you are very sweet
आजा गले लग जा पापा मेरे प्यारे प्यारे
तारे तारे कितने नील गगन पे तारे

साल के सारे ये दिन मुबारक मेरे लाल जी
जीये तू हज़ारो साल जीये तू हज़ारो साल
तुझे कुछ हो जाये तो क्या हो मेरा हाल
जीये तू हज़ारो साल , आजा गले लग जा मेरे राज दुलारे
तारे तारे कितने नील गगन पे तारे

तेरी उमर हो उतने साल जितने नील गगन पे तारे
तारे तारे कितने नील गगन पे तारे

Our Childhood Poem – कवितायेँ  हमारे  बचपन की – तारे  तारे  कितने  नील  गगन  पे  तारे
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एक चिड़िया , अनेक चिड़ियाँ

एक चिड़िया .. एक एक अनेक चिड़ियाँ……

दीदी ये अनेक क्या होता है ??

अनेक …..अनेक यानि बहुत सारे ….
जैसे …..सूरज एक … चांद एक ….. तारे अनेक ….

अच्छा तो तारों को अनेक भी कहते हैं ??
नहीं नहीं !!!

देखो फिर से बताती हूँ
सूरज एक … चांद एक ….. तारे अनेक ….

एक गिलहरी , …. एक और गिलहरी …… एक एक एक करके हो गयी अब अनेक गिलहरियां …
देखो एक तितली , अनेक तितलियाँ ….

एक चिड़िया .. एक एक अनेक चिड़ियाँ ……
अनेक चिड़ियों की कहानी सुनोगे …. हाँ सुनाओ …

एक चिड़िया , अनेक चिड़िया ….दाना चुगने बैठ गयी थी …..
(बच्चो की हँसी दीदी हमें भी सुनाओ …….)

फिर से सुनो … एक चिड़िया , अनेक चिड़ियाँ
दाना चुगने बैठ गयी थी …..

वहीँ एक ब्याध ने जाल बिछाया था …
ब्याध , ब्याध क्या होता है दीदी ?
ब्याध … चिड़िया पकड़ने वाला

तो फिर क्या हुआ , उसने चिड़ियों को पकड़ लिया …
उन्हें मार दिया …… ऊँ ..हँ …

हिम्मत से जो जुटे रहे तो बड़ा काम भी हो सकता है .
1..2..3.. फुर्र र र र र र र र र र र र र र र र र

चतुर चिड़ियाँ सयानी चिड़ियाँ , मिलजुल कर , जाल ले कर … भागी चिड़ियाँ ….
फुर्र र र र र र र र र र र र र र र र र

दूर एक गाँव में चिड़ियों के दोस्त चूहे रहते थे ….
उन्होंने उनका जाल काट दिया ………

देखा एकता में कितनी शक्ति है ……
दीदी अगर हम एक हो जाएँ तो क्या कोई भी काम कर सकते हैं ?
हाँ हाँ क्यों नहीं … तो क्या इस पेड़ के आम भी तोड़ सकते हैं , हँ
हाँ मगर जुगत लगनी होगी …
जुगत हँ…………………

अच्छा ये जुगत …. वाह बड़ा मज़ा आएगा ….
हो गए एक … बन गयी ताकत .. बन गयी हिम्मत …

हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं ,
रंग -रूप वेश -भाषा चाहे अनेक हैं

बेला गुलाब जूही चंपा चमेली …..
फूल हैं अनेक किन्तु माला फिर एक है …
एक -अनेक -एक अनेक

अरे बेला गुलाब जूही चंपा चमेली ..
फूल हैं अनेक किन्तु माला फिर एक हैं …..

एक चिड़िया .. एक एक अनेक चिड़ियाँ

Our Childhood Poem – कवितायेँ हमारे बचपन की – एक चिड़िया , अनेक चिड़ियाँ
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