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सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

  सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़ सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़ , रुकता तो सफर जाता ,चलता तो बिछड़…

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आलम इक़बाल
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अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

  अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर जहां से इश्क़ चलता…

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poets
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चंद नग्मे हुस्न वालो की नज़र

चाँद भी अधूरा है तेरे बिना जख्म है गहरे और न आये मुझे उन्हें सीना उसके जख्मो के बिन जिंदगी क्या जीना अगर लफ्ज़ो में…

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ishq ka muqadma Shayari
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हमारी उल्फ़त का यूँ न लो इम्तिहान की दुनिया हँसे हम पे

  इश्क़ का मुक़दमा हमने किया है दाखिल इश्क़ का मुक़दमा तेरे हुस्न के दरबार में अब हर रोज़ आते है यह फ़रियाद लिए की…

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