SAAKI AUR JAAM SHAYARI – साक़ी ओर पिला की पीने पिलाने की रात है

saaki aur jaam

 

वो पिला कर जाम

वो पिला कर जाम “लबों ” से अपनी मोहब्बत का “मोहसिन”
और , अब कहते हैं के नशे की आदत अच्छी नहीं होती ।

Wo Pila Kar “Jaam” Labon Se Apni Muhabbat Ka “Mohsin”
Aur , Ab Kehte Hain Ke Nashay Ki Aadat Acchi Nahi Hoti.

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जाम पे जाम

जाम पे जाम पीने से क्या फ़ायदा
रात गुज़री तो फिर उतर जाएगी
पीना है तो किसी की आँखों से पियो
उम्र सारी नशे में गुज़र जाएगी ।

Jaam Pe Jaam Pene Se Kya Faida
Raat Guzri To Phir Utar Jayegi
Peena Hai To Kisi Ki Ankhon Se Piyo
Umar Sari Nashay Mein Guzar Jayegi.

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जाम आँखों से पिलाया किसी ने

कल जो जाम आँखों से पिलाया किसी ने
मदहोश पड़ा रहा , न उठाया किसी ने

मुझे भी कुछ ज़्यादा शौक़ था पीने का
पीने के बाद जो हुआ , न बताया किसी ने

कभी मस्जिद , कभी मंदिर मैं घूमता रहा रात भर
कभी मुस्लमान , कभी हिन्दू बनाया किसी ने

आदि बना के महखाना छीन लिया गया मुझसे
कुछ इस तरह मुझे सताया किसी ने

Kal Jo Jaam Aankhon Se Pilaya Kisi Ne
MadHosh Pada Raha, Na Uthaya Kisi Ne

Mujhe Bhi Kuch Ziada Shoq Tha Pene Ka
Pene Ke Bad Jo Hua, Na Bataya Kisi Ne

Kabhi Masjid, Kabhi Mandir Main Ghoomta Raha Rat Bhar
Kabhi Musalman, Kabhi Hindu Banaya Kisi Ne

Aadi Bana Ke MayKahaana Cheen Liya Gaya Mujhse
Kuch Is Tarha Mujhe Staya Kisi Ne.

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कसूर शराब का नहीं

मदहोश हम हरदम रहा करते हैं,
और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं ,
कसूर शराब का नहीं , उनका है यारों ,
जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं ।

Madhhosh Hum Hardam Raha Karte Hain,
Aur Ilzaam Sharaab Ko Diya Karte Hain,
Kasoor Sharaab Ka Nahi, Unka Hai Yaron,
Jinka Chehra Hum Har Jaam Mein Talaash Kiya Karte Hain.

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मोहब्बत और जाम

आशिकों को मोहब्बत के आलावा अगर कुछ काम होता ,
तो मयख़ाने जा के हर रोज़ यूँ बदनाम न होता ,
मिल जाती चाहने वाली उसे भी कहीं राह में कोई ,
अगर क़दमों में उसके नशा और हाथ में जाम न होता ।

Aashikon Ko Mohabbat Ke Alava Agar Kuchh Kaam Hota,
To Maikhane Ja ke Har Roz Yun Badnam Na Hota,
Mil Jaati Chahne Wali Usse Bhi Kahin Raah Mein Koi,
Agar Kadmon Mein Nasha Aur Hath Mein Jaam Na Hota.

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हाथ में जैसे जाम आ गया

होठों पे आज उनका नाम आ गया
प्यासे के हाथ में जैसे जाम आ गया
डगमगाए कदम तो गिरे उनकी बाँहों में जा कर
आज तो पीना भी हमारा काम आ गया ।

Hothon Pe Aaj Unka Naam Aa Gaya
Pyase Ke Hath Mein Jaise Jaam Aa Gaya
Dagmgaye Kadam To Gire Unki Bahon Mein Ja Kar
Aaj To Peena Bhi Hamara Kaam Aa Gaya

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रश्क-ऐ मह्ताब

मौसम भी है , उम्र भी है और शबाब भी है …
पहलू में वो रश्क-ऐ मह्ताब भी है …
दुनिया में और चाहिए क्या मुझे ….
साकी भी है , साज़ भी है , शराब भी है ।

Mausam Bhi Hai Umar Bhi Hai Shabaab Bhi Hai…
Pehlu Mein Wo Rashk-AE Mehtaab Bhi Hai…
Duniya Mein Aur Chahiye Kya Mujhe….
Saaki Bhi Hai, Saaz Bhi Hai, Sharab Bhi Hai.

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साक़ी ओर पिला

साक़ी ओर पिला की पीने पिलाने की रात है
पी पी के आज होश में न आने की रात है
ला मैखादा उंडेल दे जाने शाराब में
मैंने सुना है , प्यास बुझाने की रात है

Saqi Aur Pila Ki Peen Pilane Ki Raat Hai
Pee Pee Ke Aaj Hosh Main Na Aane Ki Raat Hai
La Maikhada Undel De Jane Shaarab Main
Maine Suna Hai Pyaas Bujhane Ki Raat Hai

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