तुझे ऐ बेवफा हम ज़िंदगी का आसरा समझे

 

तुझे ऐ बेवफा हम ज़िंदगी का आसरा समझे

तुझे ऐ बेवफा हम ज़िंदगी का आसरा समझे
बड़े नादान थे हम हाय समझे भी तो क्या समझे

मुहब्बत में हमें तक़दीर ने धोखे दिए क्या क्या
जो दिल का दर्द था इस दर्द को दिल की दवा समझे

हमारी बेबसी ये कह रही है हाय रो रो के
डूबोया उसने कश्ती को जिसे हम नाखुदा समझे

कहाँ जाएं की इस दुनिया में कोई भी नहीं अपना
उसी ने बेवफाई की जिसे जान -ऐ -वफ़ा समझे

Urdu and Hindi Shayari – शायरी –  tujhe aie bevafaa ham zindagii kaa aasraa samjhe

 

Tujhe ae bewafa hum zindagi ka aasra samjhe

tujhe ae bewafa hum zindagi ka aasra samjhe
bade naadaan the hum haaye samjhe bhi to kyaa samjhe

muhabbat mein hamein taqdeer ne dhoke diye kyaa kyaa
jo dil kaa dard tha is dard ko dil ki davaa samjhe

hamari bebasi yeh keh rahi hai haaye ro ro ke
duboyaa usne kashti ko jise hum naKhudaa samjhe

kidhar jaayein ki is duniyaa mein koi bhi nahiin apnaa
usi ne bewafai ki jise jaan-ae-wafa samjhe

Urdu and Hindi Shayari – शायरी –  tujhe aie bevafaa ham zindagii kaa aasraa samjhe

 

 

 

 

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