महफ़िल-ऐ-शायरी – Mir Dagh Dhelvi

 

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते, अगर अपनी जिन्दगी पर हमें एतबार होता – दाग

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ऐ-यार होता
कभी जान सदके होती कभी दिल निसार होता

न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में
कोई गैर गैर होता कोई यार यार होता

यह मज़ा था दिल्लगी का के बराबर आग लगती
न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते
अगर अपनी ज़िन्दगी का हमें ऐतबार होता

DAAG DEHLVI SHAYARI – URDU SHAYARI – Tere Waade Par Sitamgar Abhi Aur Sabr Karte
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न आना तेरा

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा

Hindi and Urdu Shayari -“Daag”  – Mir Dagh Dhelvi shayari – दो लाइन शायरी – रूठना
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तेरे दिल की बात

यह जो है हुक्म मेरे पास न आए कोई
इस लिए रूठ रहे हैं की मनाये कोई

ताक में है निगाह -ऐ -शौक़ खुदा खैर करे
सामने से मेरे बचता हुआ जाए कोई

हाल अफलाक -ओ -ज़मीं का जो बताया भी तो क्या
बात वो तब है जब तेरे दिल की बताए कोई

आपने ‘दाग ‘ को मूँह भी न लगाया अफ़सोस
उस को रखता था कलेजे से लगाए कोई

हो चुका जश्न-ऐ -जलसा तो मुझे खत भेजा
आप की तरह से मेहमान बुलाये कोई

Hindi and Urdu Shayari -“Daag” baat vo hai jo tere dil ki baataaye koi , Poet: Mir Dagh Dhelvi
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मय-ओ-माशूक़

पर्दे पर्दे में आतब अच्छे नहीं
ऐसे अंदाज़-ऐ-हिजाब अच्छे नहीं

मयकदे में हो गए चुप-चाप क्यों
आज कुछ मस्त -ऐ -शराब अच्छे नहीं

ऐ फलक क्या है ज़माने की बिसात
दम -बा -दम के इंक़लाब अच्छे नहीं

तौबा कर लें हम मय-ओ-माशूक़ से
बे -मज़ा हैं ये सवब अच्छे नहीं

इक नजूमी “दाग” से कहता था आज
आप के दिन ऐ जनाब अच्छे नहीं

Hindi and Urdu Shayari -“Daag” tauba kar len ham may-o-mashuq se , Poet: Mir Dagh Dhelvi
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“दाग ” को और बेवफा कहिये

न रवा कहिये न सज़ा कहिये
कहिए कहिये मुझे बुरा कहिये

दिल में रखने की बात है गम -ऐ -इश्क़
इस को हरगिज़ न बरमला कहिये

वो मुझे क़त्ल कर के कहते हैं
मानता ही न था ये क्या कहिये

आ गई आप को मसीहाई
मरने वालो को मरहबा कहिये

होश उड़ने लगे रक़ीबों के
दाग ” को और बेवफा कहिये

Hindi and Urdu Shayari , “Daag” ko aur bevafaa kahiye , Poet: Mir Dagh Dhelvi
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तखल्लुस दाग़ है

कोई नाम -ओ -निशान पूछे तो आए क़ासिद बता देना
तखल्लुस दाग़ है और आशिक़ों के दिल में रहते हैं …

Hindi and Urdu Shayari , Koi Naam-o-Nishan Puche To Aye Qaasid Bata Dena , Poet: Mir Dagh Dhelvi
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रंज भी ऐसे उठाये हैं के जी जानता है

लुत्फ़ वो इश्क़ में पाये हैं के जी जानता है
रंज भी ऐसे उठाये हैं के जी जानता है

जो ज़माने के सितम हैं वो ज़माना जाने
तूने दिल इतने सताए हैं के जी जानता है

मुस्कुराते हुए वो मजमा -ऐ -अग्यार के साथ
आज यूँ बज़्म में आये हैं के जी जानता है

काबा -ओ -दीदार में पथरा गयीं दोनों आँखें
ऐसे जलवे नज़र आये हैं के जी जानता है

दोस्ती में तेरी दर -पर्दा हमारे दुश्मन
इस क़दर अपने पराये हैं के जी जानता है

दाग़ -ऐ -वारफता को हम आज तेरे कूचे से
इस तरह खींच के लाये हैं के जी जानता है

Hindi and Urdu Shayari , Ranj Bhee Aisay Uthaaye Hain Ke Jee Jaanta Hai,Poet: Mir Dagh Dhelvi
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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला

तुम्हारे खत मैं नया एक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था

वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं
यह काम किस ने किया है ये काम किस का था

वफ़ा करेंगे निभाएंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ यह कमाल किस का था

रहा न दिल मैं वो बे-दर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

न पूछ -पाछ थी किसी की न आओ-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतमाम किस का था

गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें
ख्याल मेरे दिल को सुबह -ओ -शाम किस का था

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला
यह पूछे इनसे कोई वो ग़ुलाम किस का था

हिंदी और उर्दू शायरी – मीर दाग़ देहलवी की शायरी – हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला
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गज़ब किया जो तेरे वादे पे एतबार किया
तमाम रात हमने क़यामत का इंतज़ार किया

न पूछ दिल की हक़ीक़त मगर यह कहतें है
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , Poet: Mir Dagh Dhelvi
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दिल की दुनिया में छा गया कोई
ता क़यामत किसी तरह न बुझे ,आग ऐसी लगा गया कोई

दिल की दुनिया उजड़ी सी क्यों है
क्या जहाँ से चला गया कोई

वक़्त-ऐ-रुखसत गले लगा कर “दाग”
हँसते हँसते रुला गया कोई

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Rahe Ga Ishq Tera Khaak Mein Mila Ke Mujhe

Poet: Daag Dehlvi

Rahe Ga Ishq Tera Khaak Mein Mila Ke Mujhe
Ke Ibtidaa Mein Huye Ranj Intihaa Ke Mujhe

Diye Hain Hijar Mein Dukh Dard Kis Balaa
Ke Mujhe Shab-E-Firaaq Ne Maara Litaa Litaa Ke Mujhe

Baghair Maut Ke Kis Tarah Koi Marta Hai
Mera Raqeeb Bhi Roya Galey Laga Ke Mujhe
Har Ik Shakhss Ko Haasil Judaa Hai Kefiyat Jafaa
Ke Lutf Tujhe Hain Mazey Wafaa Ke

Ghazab Ki Aah Meri Daagh Naam Hai Mera
Tamaam Sheher Jalaao Ge Kya Jalaa Ke Mujhe

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Ajab Apna Haal Hota Jo Visaal-E-Yaar Hota

Poet: Daag Dehlvi

Ajab Apna Haal Hota Jo Visaal-E-Yaar Hota
Kabhi Jaan Sadqe Hoti Kabhi Dil Nisaar Hota

Na Mazaa Hai Dushmani Main Na Hai Lutf Dosti Main
Koi Gair Gair Hota Koi Yaar Yaar Hota

Ye Mazaa Tha Dillagi Ka, Ke Barabar Aag Lagti
Na Tumhen Qaraar Hota Na Hamein Qaraar Hota

Tere Waade Par Sitamgar Abhi Aur Sabr Karte
Agar Apni Zindagi Ka Hamein Aitbaar Hota

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Butan-E-Mahvash Ujri Hui Manzil Main Rahte Hain

Poet: Daag Dehlvi

Butan-E-Mahvash Ujri Hui Manzil Main Rahte Hain
K Jis Ki Jan Jati Hai Usi K Dil Main Rahte Hain

Hazaron Hasraten Vo Hain K Rok Se Nahin
Ruktin Bahot Arman Aise Hain K Dil K Dil Main Rahte Hain

Khuda Rakhe Muhabbat K Liye Abad Donon Ghar
Main Un K Dil Main Rahta Hun Vo Mere Dil Main Rahte Hain

Zamin Par Panv Nakhvat Se Nahin Rakhte
Pari-Paikar Ye Goya Is Makan Ki Dusari Manzil Main Rahte Hain

Koi Nam-O-Nishan Puche To Ai Qasid Bata Dena
Takhallus “Dag” Hai Aur Ashiqon K Dil Main Rahte Hain

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Afat Ki Shokhiyan Hain Tumhari Nigah Main

Poet: Daag Dehlvi

Afat Ki Shokhiyan Hain Tumhari Nigah Main
Mehshar K Fitne Khelte Hain Jalwa-Gah Main

Wo Dushmani Se Dekhte Hain Dekhte To Hain
Main Shad Hun K Hun To Kisi Ki Nigah Main

Ati Bat Bat Mujhe Yad Bar Bar Kahata Hun Daur Daur K Qasid Se Rah Main
Is Taubah Par Hai Naz Mujhe Zahid Is Qadar Jo Tut Kar Sharik Hun Hal-E-Tabah Main

Mushtaq Is Ada K Bahot Dard-Mand The Ae Dag Tum To Baith Gaye Ek Ah Main

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