किस से पूछू कौन बताएगा यह कौन सी लड़ाई है

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किस से पूछू कौन बताएगा

किस से पूछू कौन बताएगा यह कौन सी लड़ाई है
एक अँधा युद्ध है एक खामोश गहरी खाई है

हर कोई जुड़ता है हर कोई टूटता है
यह औरों की नहीं यह अपने अंदर की लड़ाई है

गर्द से लिपटे कुछ चेहरे है जो न दिखते है
एक पत्थर हवा में उछाल के जो छुप जाते है

कुछ अनजाने भटके चेहरे मासूम जो अंजान है
मृग -तृष्णा के भंवर में छल्ले जाते है

बिना सोचे बिना समझे एक कारवां को बढ़ाते हो
क्यों तुम इस आँधी दौड़ की भेड़ चाल में खो जाते हो

हिंदी और उर्दू शायरी – खामोशी शायरी – किस से पूछू कौन बताएगा

 

Kis se Puchu Kaun Batayega

kis se puchu kaun batayega yeah kaun si ladai hai
Ek andha yudh hai ek khamosh gehri khai hai

har koi judta hai har koi tootta hai
yeah auro ki nahi yeah apne andar ki ladai hai

Gard se lipte kush chehre hai jo na deekhte hai
ek pathar hawa mein uchal ke jo chup jate hai

kuch anjane bhatke chehre masum jo anjan hai
mrig-trishna ke bhanwar mein challe jate hai

bina choche bina sanjhe ek karwaan ko bdathee to
kyon tum is andhi daud mein bhed chal mein kho jate ho

Urdu and Hindi Shayari – khamoshi Shayari – Kis se puchu kaun batayega
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