तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

Taqdir ka Afsana

 

तेरा न मिलना मेरा नसीब ही सही लेकिन
ऐ सनम मेरी किस्मत में लिखा है तुझे टूट के चाहना

 

किस्मत मैं लिखदे मेरी

किस्मत मैं मेरी चैन से जीना लिखदे
मिटा न सके कोई वो अफसाना लिखदे
जन्नत भी न-गवार है मुझे तेरे बिन
ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे

 

Kismat mein Likhde Meri

kismat main meri chain se jeena likhde
mita na sake koi wo afsana likhde
jannat bhi na-gawar hai mujhe tere bin
Ae kaatib-ae-taqdeer KHaak-e-madiina likhde

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किस्मत पर ऐतबार

किस्मत पर ऐतबार किस को है
मिल जाये ‘ख़ुशी’ इनकार किस को है
कुछ मजबूरियां हैं मेरे दोस्तों
वरना ‘जुदाई ’ से प्यार किस को है

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – किस्मत पर ऐतबार किस को है

 

Kismat Par Aitbaar

kismat par aitbaar kis ko ha
Mil jaye ‘KHUSHI’ inkaar kis ko hai
kuch ‘MAJBURIYAN’ hain mere dosto
warna! ‘JUDAI’ se pyar kis ko hai

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किस्मत से शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है
जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यों है
कितने खड़े है राहो पे
फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

 

Kismat se Shikayat

Kismat se apni sabko shikayat kyon hai
Jo nahi mil sakta usi se mohabbat kyon hai
Kitne khade hai raho pe
Phir bhi dil ko usi ki chahat kyon

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किस्मत में मोहब्बत

कुछ किस्मत ही ऐसी रही दोस्तों
की अब ज़िन्दगी से कोई तम्मना ही नहीं
जिसको चाहा हमने उसे पा न सका
जो किस्मत में थी उसे मोहब्बत न कर सके

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – जो किस्मत में थी उसे मोहब्बत न कर सके

 

Kismat Mein Mohabbat

Kuch Kismat Hi Aisi rahi Doston
Ki Ab Zindagi Se Koi Tammana hi Nahi
Jisko Chahaa humne use paa Na Saka
Jo kismat mein thi usse Mohabbat Na kar sake

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मेरे नसीब की लकड़ी

मेरी किस्मत ही बेईमानी निकली
कबर भी खोदी तो ज़मीन पत्थर की निकली
लेकर मेरा जनाजा वो जलाने गए तो
कम्बख़त मेरे नसीब की लकड़ी भी गीली निकली

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – मेरी किस्मत ही बेईमानी निकली

 

Mere Naseeb Ki Lakdi

Meri kismat bhi beimani nikli
Kabar Bhi Khodi To Zamin Pathar Ki Nikli
Lekar Mera Janaja Wo Jalane Gaye To
Kambakat Mere Naseeb Ki Lakdi Bhi Gili Nikli

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किस्मत का फैसला

मेरी तक़दीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला
मेरी मुस्कराहट पे न जा मेरा दर्द तलाश कर
आँखों से पूछ मेरे इंतज़ार की हद
इम्तिनान पे न जा मेरे सबर को तलाश कर
मेरे दोस्तों से पूछ मेरी दोस्ती का आलम
सूरत पे न जा मेरी सिरत तलाश कर
जो मिल जाये तुम को मेरी बातों के जवाब
तो फिर तू ज़रा सा काम कर
मुझे आस पास न देख मुझे खुद मैं तलाश कर

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – मेरी तक़दीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला

 

Kismat Ka Faisla

Meri Taqdeer Se Pooch Meri Kismat Ka Faisla
Meri Muskrahat Pe Na Ja Mera Dard Talash Kar
Ankhon Se Pooch Mere Intezar Ki Had
Itminan Pe Na Ja Mere Sabar Ko Talash Kar
Mere Doston Se Pooch Meri Dosti Ka Aalam
Surat Pe Na Ja Meri Seerat Talash Kar
Jo Mil Jaye Tum Ko Meri Baton Ke Jawab
To Phir Tu Zara Sa Kaam Kar
Mujhe Aas Paas Na Dekh Mujhey Khud Main Talaash Kar

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ऐसी किस्मत कहाँ अपनी

तुम्हे हासिल कर पाते ऐसी किस्मत कहाँ अपनी
बस जो कभी दिल घबराया तो तुझे याद कर लेते हैं
जानते हैं कभी अर्श तक न पहुंचेगी मुराद अपनी
फिर भी हर दुआ में तेरी फ़रियाद कर लेते हैं
चाँद तारों से सजे तेरे अक्स की तस्वीर बनाकर
हम खुद ही दिल-ऐ-नाकाम आबाद कर लेते हैं
खुद से अपने माशूक़ की तालाब करके यह आशिक़
चाँद मुकम्मल दुआएं भी बर्बाद कर लेते हैं
अब जबकि इस दुनिया से तेरी कोई चाहत न रही
बस तेरा तखल्लुस ही ‘शाद’ कर लेते हैं

किस्मत उर्दू शायरी – तक़दीर का अफसाना शायरी – मेरी तक़दीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला

 

Aisi Kismat Kahan Apni

Tumhe Haasil Kar Pate Aisi Kismat Kahan Apni
Bas Jo Kabhi Dil Ghabraya To Tujhe Yaad Kar Lete Hain
Jaante Hain Kabhi Arsh Tak Na Pahunchegi Muraad meri
Fir Bhi Har Dua Me Teri Fariyaad Kar Lete Hain
Chand Taron Se Saje Tere Aks Ki Tasveer Banakar
Hum Khud Hi Dile-Nakaam Aabaad Kar Lete Hain
Khuda Se Apne Mashuq Ki Talab Karke Yeh Aashiq
Chand Mukammal Duayen Bhi Barbaad Kar Lete Hain
Ab Jabki Is Duniya Se Teri Koi Chahat Na Rahi
Bas Tera Takhallus Hi ‘Shaad’ Kar Lete Hain

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