तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

teri zulfe

 

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – Teri Zulfe Urdu Shayari

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन”
घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले

 

ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे

ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे
होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे
अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें
किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे

 

Zulf khuli ho jaise

Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise
Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise
Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN
Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise

Teri Zulfe urdu shayari – Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise
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ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये

यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है
इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है
जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है
बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है
वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है

 

Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye

Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai
Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai
Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai
Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai
Waise to tumhi ne mujhe barbaad kiya hai
Ilzaam kisi aur ke sar jaye to accha hai

Teri Zulfe urdu shayari – Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai
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परेशान ज़ुल्फ़-ऐ-यार

छलके हुए थे जाम परेशान थी ज़ुल्फ़-ऐ-यार
कुछ ऐसे हादसात से घबरा के पी गया
कांटे तो खैर कांटे हैं इस का गिला ही क्या
फूलों की वारदात से घबरा के पी गया .

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – छलके हुए थे जाम परेशान थी ज़ुल्फ़-ऐ-यार

 

Pareshaan Zulf-AE-Yaar

Chhalke hue the jaam pareshaan thi zulf-AE-yaar
kuchh aise haadsaat se ghabra ke pee gaya
Kaante to khair kaante hain iss ka gila hi kya
phoolon ki waardaat se ghabra ke pee gaya.

Teri Zulfe urdu shayari – Chhalke hue the jaam pareshaan thi zulf-AE-yaar
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ज़ुल्फ़ रातों सी

ज़ुल्फ़ रातों सी , रंगत है उजालों जैसी
पर तबियत है वही , भूलने वालों जैसी
ढूढ़ता फिरता हूँ , लोगों में शबाहत उसकी
के वो ख्वाबों में भी लगती है , ख्यालों जैसी

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – ज़ुल्फ़ रातों सी , रंगत है उजालों जैसी

 

Zulf Raaton Si

Zulf raaton si, rangat hai ujaalon jaisi
par tabiyat hai wohi, bhulne walon jaisi
?Dhoonta phirta hun, logon mein shabahat uski?
ke wo khwabon mein bhi lagti hai, khayalon jaisi

Teri Zulfe urdu shayari – Zulf raaton si, rangat hai ujaalon jaisi
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चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन
क्यों रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन
राज़ों की तरह उतरो मेरे दिल में किसी शब्
दस्तक पे मेरे हाथ की खिल जाओ किसी दिन

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन

 

Chehre pe mere Zulf

Chehre pe mere zulf ko pheilao kisi din
Kia roz garjte ho baras jao kisi din
Razon ki tarah utro mere dil mein kisi shab
Dastak peh mere hath ki khil jao kisi din

Teri Zulfe urdu shayari – Chehre pe mere zulf ko pheilao kisi din
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ज़ुल्फ़ को बादल लिखो

आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बादल लिखो
जिस से नाराज़ हो उस शख्स की हर बात लिखो
जिस से मिलकर भी न मिलने की कसक बाक़ी है
उसी अनजान इंसान की मुलाक़ात लिखो

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बादल लिखो

 

Zulf Ko Badal Likho

Aankh Ko Jaam Likho Zulf Ko Badal Likho
Jis Se Naraz Ho Uss Shakhs Ki Har Baat Likho
Jis Se Milkar Bhi Na Milne Ki Kasak Baaqi Hai
Usee Anjaan insaan Ki Mulaqaat Likho

Teri Zulfe urdu shayari – Aankh Ko Jaam Likho Zulf Ko Badal Likho
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ज़ुल्फो की तारीफ

उसकी ज़ुल्फो की तारीफ में क्या कहिये
जैसे दिन ढलते ही छायी अंधयारी है
हो चली है पवन भी पागल
उसकी ज़ुल्फ़ लहर हो लहराई है

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – उसकी ज़ुल्फो की तारीफ में क्या कहिये

 

Zulafo Ki Tarif

Uski Zulafo Ki Tarif Mein Kya Kahiye
Jaise Din Dhalte Hi Chhayi Andhyari Hai
Ho Chali Hai Pawan Bhi Pagal
Uski Zulaf Lehar-ho Leharaayi Hai

Teri Zulfe urdu shayari – Uski Zulafo Ki Tarif Mein Kya Kahiye
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तेरी ज़ुल्फ़ के साये

तेरी ज़ुल्फ़ के साये तस्बूर में रहते हैं
में सुबह को शामें लिखता रहता हूँ
तेरे हिजर में ओर मुझे क्या करना है
तेरे नाम किताबें लिखता रहता हूँ

तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी – तेरी ज़ुल्फ़ के साये तस्बूर में रहते हैं

 

Teri Zulf Ke Saye

Teri Zulf Ke Saye tasabur Mein Rehte Hain
Mein subha Ko Shamein Likhta Rehta Hoon
Tere Hijar Mein Or Mujhe Kiya Karna Hain
Tere Naam Kitabein Likhta Rehta Hoon

Teri Zulfe urdu shayari – Teri Zulf Ke Saye tasabur Mein Rehte Hain
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