वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

तुझसे मिलकर


तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था,
तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया.

हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था

 

Tujhase Milakar

Tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut ronaa thaa
tangii-ae-waqt-ae-mulaaqaat ne rone na diyaa

Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut
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वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर,
चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं,
इन को खो कर अभी जान-ए-जाँ,
उम्र भर न तरसते रहो.

– फैयाज़
हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर

 

Waqt ki Qaid Mein Zindagi

waqt ki qaid mein zindagi hai magar
chand ghadiyaan yahi hain jo aazaad hai
In ko khoo kar abhi jaan-e-jaaN
umar bhar na taraste raho –

–Faiyaz
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