जब कभी हँसते है तो आंखें छलक पड़ती हैं

yaad-ae-maazi

याद -ऐ -माझी

यूं ही आज याद -ऐ -माझी ने रुला दिया है मुझे
मौत से भी पहले ज़िन्दगी ने सुला दिया है मुझे

पास रह के भी मेरे दोस्त क्यों हैं दूर
इसी सोच ने अंदर तक हिला दिया है मुझे

बिछड़े हुए यारों की याद आई है इतनी
इन यादों की तपीश ने जला दिया है मुझे

बीती हुए यादों को खुरचने की कोशिश ने
हंसी , ख़ुशी , ज़िन्दगी सब कुछ भुला दिया है मुझे

जब कभी हँसते है तो आंखें छलक पड़ती हैं
यूं ग़मो ने आँसूओ से मिला दिया है मुझे

हिंदी और उर्दू शायरी – याद -ऐ -माझी  शायरी – जब कभी हँसते है तो आंखें छलक पड़ती हैं

 

Yaad-ae-maazi

yoon hi aaj yaad-ae-maazi ne rula diya hai mujhe
mout se bhi pehle zindagi ne sula diya hai mujhe

pass reh ke bhi mere dost kyon hain dur
issi soch ne under tak hila diya hai mujhe

bichrey hue yaaron ki yaad aye hai itni
in yaadin ki tapish ne jala diya hai mujhe

beeti hue yaadon ko khuruchney ki koshish ne
hunsi , khushi , zindagi sub kuch bhula diya hai mujhe

Jab kabhi hanste hai to aankhain chalak padti hain
yoon gamoon ne aansoon se mila diya hai mujhe

Urdu and Hindi Shayari – yaad-e-maazi Shayari – Jab kabhi hanste hai to aankhain chalak padti hain
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