कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी – अल्लामा इक़बाल की शायरी

अल्लामा इक़बाल

 

कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी

आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी
सोने से काबिल ही मुझे रुला देगी
आँख लग गई भले से , तो डर है
कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लामा इक़बाल की शायरी – आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी

 

Koi Awaaz Phir Mujhe Jaga Degi

Aaj Pher Teri Yaad Mushkil Bana degi
Sone Se kabil hi Mujhe Rula degi
Aankh Lag Gai Bhale Se to Daar Hai
Koi Awaaz Phir Mujhe Jaga degi

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गुनाह करता है खुद

हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर
गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है शैतान पर

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लामा इक़बाल की शायरी की शायरी – हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर

 

Gunah Karta Hai Khud

Hansi Aati Hai Mujhe Hasrate Insaan Par
Gunah Karta Hai Khud Aur Lanat Bhejta Hai Saitan Par

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मिटा दे अपनी हस्ती

मिटा दे अपनी हस्ती को अगर खुद मर्तबा चाहे
की दाना खाक में मिलकर गुल ओ गुलज़ार बनता है

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लामा इक़बाल की शायरी – यार को मैंने मुझे यार ने सोने न दिया

 

Mita de Apni Hasti

Mita de Apni Hasti Ko Agar Khud Mrtaba Chahe
Ki Dana Khak Mein Milkar Gul-O-Gulzar Banta Hai

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दाग़े मुहब्बत

इस दौर की ज़ुल्मत में हर कल्बे परेशान को
वो दाग़े मुहब्बत दे जो चाँद को शर्मा दे

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लामा इक़बाल की शायरी – यार को मैंने मुझे यार ने सोने न दिया

 

Daag-AE-Muhabbat

Is Doar Ki Zulmat Mein Har Qalbe Preeshan Ko
Wo Daag-AE-Mohabbat De Jo Chand Ko Sharma De

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