ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – मुनीर नियाज़ी

Zindgi ki Kitab

 

ज़िन्दगी की किताब

यह जो ज़िन्दगी की किताब है
यह किताब भी क्या किताब है
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है
कहीं जान लेवा अज़ाब है

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – यह जो ज़िन्दगी की किताब है


Zindgi ki Kitab

Yeh jo Zindgi ki kitab hai
Yeh kitab bhi kya kitab hai
Kahin ek haseen sa khwab hai
Kahin jaan levaa azaab hai

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Yeh jo Zindgi ki kitab hai

 

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रहमतों की हैं बारिशें

कभी खो दिया कभी पा लिया
कभी रो लिया कभी गा लिया
कहीं रहमतों की हैं बारिशें
कहीं तिशनगी बेहिसाब है

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – कभी खो दिया कभी पा लिया


Rehmaton ki Hain Barishain

Kbhi kho diya kbhi pa liya
Kabhi ro liya kbhi gaa liya
Kahin rehmaton ki hain barishain
Kahin tishnagi behisab hai

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Kbhi kho diya kbhi pa liya
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वो क़यामतें जो गुज़र गयीं

कोई हद नहीं है कमाल की
कोई हद नहीं है जमाल की

वो ही क़ुर्ब-ओ-दौर की मंज़िलें
वो ही शाम खवाब-ओ-ख्याल की

न मुझे ही उसका पता कोई
न उसे खबर मेरे हाल की

यह जवाब मेरी सदा का है
के सदा है उसके सवाल की

वो क़यामतें जो गुज़र गयीं
थी अमानतें कई साल की

यह नमाज़-ऐ-असर का वक़्त है
यह घडी है दिन के ज्वाल की

है “मुनीर ” सुबह -ऐ -सफर नया
गयी बात शब् के मलाल की

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – वो क़यामतें जो गुज़र गयीं

 


Wo Qayamatein Jo Guzar Gayein

Koi had nahi hai kamaal ki
Koi had nahi hai jamaal ki

Wo hi qurb-O-daur ki manzilein
Wo hi sham khawab-O-khyaal ki

Na mujhe hi uska pata koi
Na use khabar mere haal ki

Yeh jawaab meri sada ka hai
Ke sada hai uske sawaal ki

Wo Qayamatein Jo Guzar Gayein
ThiN amanaten kayee saal ki

Yeh namaaz-AE-asar ka waqt hai
Yeh ghadi hai din ke zawaal ki

Hai “MONIR” subh-AE-safar naya
Gayee baat shab ke malaal ki

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Wo Qayamatein Jo Guzar Gayein
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दिल की खलिश

ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएं हम तो क्या
दुनिया से ख़ामोशी से गुज़र जाएं हम तो क्या

हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने
एक ख्वाब है जहां में बिखर जाएं हम तो क्या

अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ
शाम आ गयी है लौट के घर जाएं हम तो क्या

दिल की खलिश तो साथ रहेगी तमाम उम्र
दरिया -ऐ -गम के पार उतर जाएं हम तो क्या

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – दिल की खलिश तो साथ रहेगी तमाम उम्र

 

Dil ki khalish

Zindaa rahein to kya hai jo mar jayein hum to kya
Duniya se khamoshi se guzar jayein hum to kya

Hasti hi apani kya hai zamane ke samne
Ek khwab hai jahaan main bikhar jayein hum to kya

Ab kaun muntazir hai hamare liye wahaan
shaam aa gayi hai laut ke ghar jayein hum to kya

Dil ki khalish to saath rahegi tamam Umar
Dariya-ae-gam ke paar utar jayein hum to kya

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Dil ki khalish to saath rahegi tamam Umar

 

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